दक्षिण का कैलाश: क्यों 'कांचीपुरम' को कहा जाता है हजारों मंदिरों का शहर? जानें इसकी आध्यात्मिक विरासत

जब भी भारत के सबसे पवित्र शहरों की चर्चा होती है, तो उत्तर भारत के काशी या मथुरा का नाम स्वतः ही जुबां पर आ जाता है। लेकिन दक्षिण भारत के तमिलनाडु में पलार नदी के तट पर एक ऐसा प्राचीन शहर बसा है, जिसे 'सिटी ऑफ थाउजेंड टेंपल्स' (हजारों मंदिरों का शहर) के गौरवमयी नाम से जाना जाता है। हम बात कर रहे हैं कांचीपुरम की, जो अपनी विश्वप्रसिद्ध रेशमी साड़ियों के साथ-साथ अपनी अद्वितीय आध्यात्मिक विरासत के लिए पूरी दुनिया में विख्यात है।

05 Mar 2026  |  170

कांचीपुरम | सांस्कृतिक डेस्क जब भी भारत के सबसे पवित्र शहरों की चर्चा होती है, तो उत्तर भारत के काशी या मथुरा का नाम स्वतः ही जुबां पर आ जाता है। लेकिन दक्षिण भारत के तमिलनाडु में पलार नदी के तट पर एक ऐसा प्राचीन शहर बसा है, जिसे 'सिटी ऑफ थाउजेंड टेंपल्स' (हजारों मंदिरों का शहर) के गौरवमयी नाम से जाना जाता है। हम बात कर रहे हैं कांचीपुरम की, जो अपनी विश्वप्रसिद्ध रेशमी साड़ियों के साथ-साथ अपनी अद्वितीय आध्यात्मिक विरासत के लिए पूरी दुनिया में विख्यात है।

क्यों मिला इसे 'हजारों मंदिरों का शहर' का नाम?

इतिहासकारों और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्राचीन काल में कांचीपुरम में 1,000 से भी अधिक मंदिर हुआ करते थे। इन मंदिरों का निर्माण पल्लव, चोल और विजयनगर जैसे महान साम्राज्यों के शासनकाल के दौरान किया गया था।

वर्तमान स्थिति: समय की मार के बावजूद आज भी यहाँ 120 से ज्यादा विशाल और भव्य मंदिर पूरी तरह सुरक्षित हैं।

सप्त पुरी में स्थान: हिंदू धर्म में मोक्ष प्रदायिनी सात सबसे पवित्र शहरों (सप्त पुरी) में कांचीपुरम को अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है।

अनोखा संगम: यह शहर शैव (शिव भक्त) और वैष्णव (विष्णु भक्त) दोनों संप्रदायों के मिलन का साक्षी है, जो भारतीय संस्कृति की विविधता को दर्शाता है।

वास्तुकला के बेजोड़ स्तंभ: कांचीपुरम के मुख्य आकर्षण

1. कैलाशनाथर मंदिर: पत्थर पर काष्ठ जैसी नक्काशी यह कांचीपुरम का सबसे प्राचीन मंदिर है, जिसे पल्लव राजाओं ने बनवाया था। इसकी दीवारों पर की गई नक्काशी इतनी बारीक और जीवंत है कि देखने पर यह पत्थर नहीं बल्कि लकड़ी पर उकेरी गई कलाकृति जैसी प्रतीत होती है।

2. एकम्बरेश्वर मंदिर: पृथ्वी तत्व का प्रतीक यह शहर का सबसे विशाल मंदिर है, जो भगवान शिव के 'पृथ्वी तत्व' को समर्पित है। पौराणिक कथा के अनुसार, यहाँ देवी पार्वती ने स्वयं मिट्टी से शिवलिंग बनाकर पूजा की थी, इसलिए यहाँ 'पृथ्वी लिंग' की आराधना की जाती है।

3. कामाक्षी अम्मन मंदिर: शांति और शक्ति का केंद्र कांचीपुरम केवल शिव और विष्णु का ही नहीं, बल्कि शक्ति का भी बड़ा केंद्र है। कामाक्षी अम्मन मंदिर प्रमुख शक्तिपीठों में गिना जाता है, जहाँ देवी कामाक्षी पद्मासन मुद्रा में विराजमान हैं।

साड़ियों और मंदिरों का अनोखा रिश्ता

दिलचस्प बात यह है कि कांचीपुरम की पहचान केवल पत्थरों तक सीमित नहीं है। यहाँ की मशहूर 'कांजीवरम साड़ियों' का सीधा संबंध यहाँ के मंदिरों से है। इन साड़ियों के बॉर्डर और सुनहरे डिजाइन अक्सर मंदिरों की नक्काशी और ऊँचे 'गोपुरम' (प्रवेश द्वार) की आकृतियों से प्रेरित होते हैं।

निष्कर्ष: कांचीपुरम एक ऐसा जीवंत संग्रहालय है, जहाँ पत्थर बोलते हैं और इतिहास सांस लेता है। यदि आप वास्तुकला के प्रेमी हैं या शांति और आध्यात्मिकता की खोज में हैं, तो इस 'हजारों मंदिरों के शहर' की यात्रा आपके जीवन का एक अविस्मरणीय अनुभव हो सकती है।