नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने आगामी रबी विपणन सत्र 2026-27 के लिए अपनी तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया है। शनिवार (7 मार्च, 2026) को हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में सरकार ने किसानों से 30.3 मिलियन टन (303 लाख टन) गेहूं खरीदने का लक्ष्य निर्धारित किया है। यह खरीद 1 अप्रैल, 2026 से शुरू होने वाले सेंट्रल पूल के लिए की जाएगी।
यह लक्ष्य पिछले वर्ष के लगभग समान ही रखा गया है, जो देश में अनाज के स्थिर उत्पादन और पर्याप्त भंडार का संकेत देता है।
प्रमुख आंकड़े और खरीद योजना
खाद्य मंत्रालय और भारतीय खाद्य निगम (FCI) के अधिकारियों के बीच हुई इस बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए:
गेहूं खरीद (2026-27): 30.3 मिलियन टन का लक्ष्य।
पिछला रिकॉर्ड (2025-26): पिछले साल लगभग 26 लाख किसानों से 30.03 मिलियन टन गेहूं खरीदा गया था।
चावल की खरीद: 2025-26 के रबी सत्र के लिए 7.6 मिलियन टन चावल की खरीद का लक्ष्य तय किया गया है।
मोटे अनाज पर जोर: सरकार ने राज्यों को किसानों से सीधे 0.77 मिलियन टन (7.7 लाख टन) मोटे अनाज (Shri Anna) और बाजरा खरीदने का निर्देश दिया है।
क्वालिटी पर फोकस: 'इम्प्रूव्ड राइस' का पायलट प्रोजेक्ट
बैठक में अनाज की गुणवत्ता और वितरण प्रणाली को लेकर भी चर्चा हुई:
10% टूटे चावल का नियम: सरकार ने पाँच राज्यों में एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है, जिसके तहत केवल 10% तक टूटे हुए दानों (broken grains) वाले 'बेहतर गुणवत्ता' के चावल की आपूर्ति की जाएगी। राज्यों से इसके क्रियान्वयन पर फीडबैक माँगा गया है।
PDS सुदृढ़ीकरण: सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) की सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए तकनीक आधारित पहलों की समीक्षा की गई।
क्यों अहम है यह खरीद?
भारत में गेहूं का उत्पादन इस साल रिकॉर्ड 120 मिलियन टन तक पहुँचने की उम्मीद है। रिकॉर्ड बुवाई और अनुकूल मौसम ने सरकार को यह महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखने का आधार दिया है।
खाद्य सुरक्षा: पर्याप्त खरीद से PM-GKAY जैसी योजनाओं के लिए अनाज का भंडार सुनिश्चित होगा।
निर्यात की संभावना: हाल ही में गेहूं निर्यात पर लगे प्रतिबंधों में ढील दी गई है, जिससे वैश्विक बाजार में भारतीय गेहूं की मांग बढ़ी है।
किसानों को लाभ: न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर रिकॉर्ड खरीद से किसानों की आय में स्थिरता आएगी।