खाड़ी संकट की मार: भारत का ₹1 लाख करोड़ का कृषि निर्यात खतरे में, किसान और निर्यातक बेहाल

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का असर अब भारत के खेतों और मंडियों तक पहुँचने लगा है। GTRI की रिपोर्ट के अनुसार, भारत के कुल कृषि निर्यात का 21.8 प्रतिशत हिस्सा अकेले इसी क्षेत्र में जाता है। शिपिंग रूट पर बढ़ते खतरे, जहाजों के ऊंचे बीमा (Insurance) और लॉजिस्टिक लागत ने भारतीय खाद्य उत्पादों के भविष्य पर अनिश्चितता के बादल मंडरा दिए हैं।

08 Mar 2026  |  106

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का असर अब भारत के खेतों और मंडियों तक पहुँचने लगा है। GTRI की रिपोर्ट के अनुसार, भारत के कुल कृषि निर्यात का 21.8 प्रतिशत हिस्सा अकेले इसी क्षेत्र में जाता है। शिपिंग रूट पर बढ़ते खतरे, जहाजों के ऊंचे बीमा (Insurance) और लॉजिस्टिक लागत ने भारतीय खाद्य उत्पादों के भविष्य पर अनिश्चितता के बादल मंडरा दिए हैं।

इन उत्पादों पर टूटेगा संकट का पहाड़

भारत के कई राज्यों के किसान सीधे तौर पर खाड़ी देशों की मांग पर निर्भर हैं। निर्यात बाधित होने से सबसे ज्यादा असर इन क्षेत्रों पर पड़ेगा:

उत्पाद श्रेणीनिर्यात मूल्य (2025)वैश्विक निर्यात का हिस्साप्रभावित राज्य
चावल$4.43 बिलियन36.7%पंजाब, हरियाणा, यूपी, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना
मीट और सीफूड$1.81 बिलियन~98% (भेड़/बकरी मांस)यूपी, महाराष्ट्र, तेलंगाना
डेयरी उत्पाद$281.1 मिलियन58.1% (मक्खन/डेयरी फैट)गुजरात, राजस्थान, पंजाब
पेय पदार्थ-81% (बीयर), 55.6% (सॉफ्ट ड्रिंक)औद्योगिक क्षेत्र

निर्यात की 'दुखती रग': अत्यधिक निर्भरता

GTRI के संस्थापक अजय श्रीवास्तव के अनुसार, पिछले एक दशक में भारतीय कृषि क्षेत्र की पश्चिम एशियाई बाजारों पर निर्भरता खतरनाक स्तर तक बढ़ गई है।

मांस निर्यात: भारत के भेड़ और बकरी के मांस का 98.9% हिस्सा केवल इसी क्षेत्र में जाता है।

फल और सब्जियां: केला ($39.65 करोड़), प्याज और लहसुन जैसे उत्पादों के लिए खाड़ी देश सबसे बड़े खरीदार हैं।

तंबाकू: कुछ श्रेणियों में भारत के कुल निर्यात का 50% हिस्सा इसी क्षेत्र को भेजा जाता है।

शिपिंग रूट और बढ़ती लागत की चुनौती

युद्ध के कारण लाल सागर (Red Sea) और अन्य समुद्री मार्ग असुरक्षित हो गए हैं। निर्यातकों को अब लंबे रास्तों का चुनाव करना पड़ रहा है, जिससे:

माल ढुलाई (Logistics) का समय बढ़ गया है।

बीमा प्रीमियम में भारी बढ़ोतरी हुई है।

ताजा फल और सब्जियों के खराब होने का जोखिम बढ़ गया है।

विशेषज्ञों की सलाह: बाजार विविधीकरण (Market Diversification) ही समाधान

रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि किसी एक क्षेत्र पर इतनी अधिक निर्भरता व्यापारिक दृष्टिकोण से आत्मघाती साबित हो सकती है। अब समय आ गया है कि भारत अपने कृषि उत्पादों के लिए अफ्रीका, दक्षिण-पूर्वी एशिया और लैटिन अमेरिका जैसे नए बाजारों की तलाश करे। यदि जल्द ही निर्यात के वैकल्पिक रास्ते और बाजार नहीं खोजे गए, तो इसका सीधा असर घरेलू बाजार में कीमतों के गिरने और किसानों की आय कम होने के रूप में दिखेगा।

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