लॉस एंजिल्स/मुंबई | ग्लोबल आइकॉन प्रियंका चोपड़ा इन दिनों अपनी बहुप्रतीक्षित फिल्म 'वाराणसी' की तैयारियों में व्यस्त हैं, जो 2027 में बड़े पर्दे पर दस्तक देगी। इसी बीच, 'नॉट स्किनी बट नॉट फैट' पॉडकास्ट में अमांडा हिर्श के साथ बातचीत करते हुए प्रियंका ने उन कड़वे अनुभवों को साझा किया, जिन्होंने उन्हें अपने करियर के चरम पर बॉलीवुड छोड़कर सात समंदर पार जाने के लिए मजबूर किया।
बॉलीवुड में 'सीमित' महसूस करने का दौर
प्रियंका ने खुलासा किया कि साल 2015 के आसपास, जब वे हिंदी सिनेमा की टॉप एक्ट्रेसेस में शुमार थीं, तब इंडस्ट्री में उनके कुछ रिश्ते काफी तनावपूर्ण हो गए थे। उन्होंने कहा:
"मुझे इंडिया में काम करते हुए लिमिटेड महसूस होने लगा था। मैं देखना चाहती थी कि दुनिया के दूसरे हिस्से में मेरे लिए क्या संभावनाएं हैं। कुछ लड़ाइयां ऐसी होती हैं जिन्हें हमें संभालना होता है, लेकिन मैं ऐसी इंसान हूँ जिसे 'गंदगी' (politics/toxicity) में रहना पसंद नहीं है, क्योंकि फिर आपको उसकी बदबू की आदत हो जाती है।"
ऐश्वर्या राय और मिंडी कलिंग से मिली हिम्मत
प्रियंका ने स्वीकार किया कि उस समय हॉलीवुड में भारतीय कलाकारों का प्रतिनिधित्व न के बराबर था। उन्होंने दो प्रमुख हस्तियों का नाम लिया जिन्होंने उन्हें प्रेरित किया:
ऐश्वर्या राय बच्चन: प्रियंका के अनुसार, ऐश्वर्या ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर जो राह दिखाई, उसने उन्हें हौसला दिया।
मिंडी कलिंग: हॉलीवुड में मिंडी की सफलता ने प्रियंका को यह सोचने पर मजबूर किया कि अगर वे कर सकती हैं, तो मैं क्यों नहीं?
9वीं क्लास की उस लड़की का संघर्ष
प्रियंका ने अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए कहा कि हॉलीवुड में शुरुआत करना उन्हें वैसा ही लगा जैसे अमेरिका में स्कूल जाने वाली उस 9वीं क्लास की लड़की को लगता था, जो वहां सबसे अलग दिखती थी।
"वहां मेरे लिए कोई बना-बनाया रास्ता नहीं था। मुझे बस खुद पर और अपनी मेहनत पर भरोसा था। मुझे किसी भी फिल्ममेकर के सामने खड़ा कर दो, मुझे अपना काम आता है।"
'वाराणसी' और भविष्य की योजनाएं
प्रियंका चोपड़ा की आगामी फिल्म 'वाराणसी' को लेकर फैंस के बीच जबरदस्त उत्साह है। बताया जा रहा है कि यह फिल्म भारतीय संस्कृति और एक गहन मानवीय कहानी का मेल होगी। यह प्रोजेक्ट प्रियंका के उस विजन का हिस्सा है जिसके जरिए वे वैश्विक स्तर पर भारतीय कहानियों को और अधिक मजबूती से पेश करना चाहती हैं।