नई दिल्ली | 80 और 90 के दशक में जब लता मंगेशकर और आशा भोसले जैसी दिग्गजों का प्रभाव था, उसी दौर में एक ऐसी आवाज़ उभरी जिसने अपनी शास्त्रीय शुद्धता और मधुरता से संगीत प्रेमियों को अपना कायल बना लिया। हम बात कर रहे हैं साधना सरगम की, जिन्होंने न केवल बॉलीवुड बल्कि दक्षिण भारतीय सिनेमा में भी अपनी गायकी का लोहा मनवाया।
साधना घाणेकर से 'साधना सरगम' बनने का सफर
7 मार्च 1969 को जन्मी साधना को संगीत विरासत में मिला था। उनकी माँ नीला घाणेकर स्वयं एक शास्त्रीय गायिका थीं। साधना की प्रतिभा को पहचानते हुए संगीतकार कल्याणजी ने उन्हें 'सरगम' उपनाम दिया। उनका मानना था कि उनकी आवाज़ में संगीत के सात सुर बसते हैं।
पहली प्रस्तुति: मात्र 6 साल की उम्र में उन्होंने दूरदर्शन के प्रसिद्ध गीत 'एक चिड़िया अनेक चिड़िया' को अपनी आवाज़ दी थी।
शास्त्रीय शिक्षा: उन्होंने संगीत के दिग्गज पंडित जसराज से सात वर्षों तक कठिन शास्त्रीय संगीत की दीक्षा ली, जो उनकी गायकी की गहराई में स्पष्ट झलकता है।
हिट गानों की लंबी फेहरिस्त
साधना सरगम ने अपने करियर में 15 हजार से अधिक गाने गाए। उन्हें असली पहचान 1983 में फिल्म 'कलाकार' के गीत 'नीले नीले अंबर पर' से मिली। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा:
सदाबहार हिट्स: 'जब कोई बात बिगड़ जाए', 'सात सहेलियां' और बी.आर. चोपड़ा की 'महाभारत' के गीतों ने उन्हें घर-घर में लोकप्रिय बना दिया।
बहुमुखी प्रतिभा: फिल्म गानों के अलावा उन्होंने 'साई दर्शन' और 'ओम नमः शिवाय' जैसे कई प्रसिद्ध भक्ति एल्बम और गजलें भी गाईं।
पुरस्कारों से नवाजा गया सम्मान
साधना की प्रतिभा को केवल तालियों से नहीं, बल्कि कई बड़े पुरस्कारों से भी सराहा गया। उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार के अलावा दक्षिण भारत के फिल्मफेयर, महाराष्ट्र, गुजरात और ओडिशा के राज्य फिल्म पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है।
अचानक गुमनामी और सादगी
90 के दशक में सफलता के चरम पर रहने के बाद, साधना सरगम धीरे-धीरे मुख्यधारा के फिल्म संगीत से दूर होती गईं। हालांकि उन्होंने भक्ति संगीत और क्षेत्रीय सिनेमा में काम जारी रखा, लेकिन बड़े पर्दे के प्लेबैक सिंगिंग में उनकी कमी आज भी महसूस की जाती है। उन्हें आखिरी बार बड़े स्तर पर 'महाकुंभ' जैसे आयोजनों में देखा गया था।
निष्कर्ष: आज के शोर-शराबे वाले संगीत के दौर में साधना सरगम की आवाज़ उस सुकून की तरह है, जो आज भी यूट्यूब और स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स पर करोड़ों बार सुनी जाती है। वे एक ऐसी कलाकार हैं जिन्होंने संख्या से अधिक गुणवत्ता को प्राथमिकता दी।