नई दिल्ली | मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) में जारी भीषण संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में पैदा हुए गतिरोध के बावजूद भारत की खाद आपूर्ति व्यवस्था पूरी तरह सुरक्षित है। सरकार ने समय रहते रणनीतिक कदम उठाते हुए खरीफ 2026 सीजन के लिए खाद का पर्याप्त बफर स्टॉक सुनिश्चित कर लिया है, जिससे वैश्विक कीमतों में उछाल का असर भारतीय किसानों पर नहीं पड़ेगा।
1. पिछले साल के मुकाबले कहीं मजबूत स्थिति
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 13 मार्च 2026 तक भारत के पास खाद का भंडार पिछले वर्ष की तुलना में काफी बेहतर स्तर पर है।
| खाद का प्रकार | वर्तमान स्टॉक (लाख टन) | पिछले साल की तुलना में स्थिति |
|---|---|---|
| यूरिया | 62 लाख टन | 10 लाख टन अधिक |
| डीएपी (DAP) | 25 लाख टन | लगभग दोगुना |
| एनपीके (NPK) | 56 लाख टन | रिकॉर्ड स्तर (पिछली बार 31 लाख टन था) |
2. 'केप ऑफ गुड होप' से सुरक्षित सप्लाई लाइन
होर्मुज जलडमरूमध्य में जोखिम बढ़ने के बाद भारत ने वैकल्पिक मार्गों और रणनीतिक अनुबंधों का सहारा लिया है:
रूस और मोरक्को: यूरिया, डीएपी और एनपीके की आपूर्ति 'केप ऑफ गुड होप' के रास्ते बिना किसी रुकावट के भारत पहुँच रही है।
सऊदी अरब: डीएपी के लिए 3 मिलियन टन का 5 साल का अनुबंध पूरी तरह सक्रिय है और आपूर्ति सुचारू रूप से जारी है।
शिपमेंट: फरवरी के मध्य में ऑर्डर किए गए 13.5 लाख टन यूरिया में से 90% हिस्सा मार्च के अंत तक भारतीय बंदरगाहों पर पहुँच जाएगा।
3. घरेलू उत्पादन और मेंटेनेंस की स्मार्ट प्लानिंग
सरकार ने घरेलू स्तर पर भी मोर्चा संभाला है:
गैस खरीद: एम्पावर्ड पूल मैनेजमेंट कमिटी (EPMC) ने स्पॉट गैस खरीद को मंजूरी दे दी है, जिसकी पहली खेप GAIL द्वारा मंगलवार तक खरीदी जाएगी।
मेंटेनेंस शेड्यूल: खाद संयंत्रों (Plants) के सालाना मेंटेनेंस का काम मार्च में ही पूरा किया जा रहा है, ताकि मई में जब मांग चरम पर हो, तब सभी प्लांट अपनी पूर्ण क्षमता (Full Capacity) से चल सकें।
4. किसानों के लिए बेफिक्र खरीफ सीजन
सरकार को भरोसा है कि 15 मई से शुरू होने वाली पीक डिमांड (अत्यधिक मांग) से पहले स्टॉक 'आरामदायक' स्तर पर होगा। भारत अपनी खाद जरूरतों का लगभग 30% आयात करता है, जिसमें से 40% मध्य पूर्व से आता है। इस बार सरकार ने आयात के ऑर्डर्स को समय से पहले देकर सप्लाई चेन के जोखिम को शून्य कर दिया है।
निष्कर्ष: भारत की सक्रिय खरीद रणनीति और घरेलू प्रबंधन ने यह सुनिश्चित किया है कि वैश्विक युद्ध की लपटें भारत के खेतों तक न पहुँचें। यदि मानसून सामान्य रहता है, तो खरीफ 2026 का कृषि उत्पादन निर्बाध रहेगा।