पंजाब सोलर पॉलिसी पर सवाल: 'मुफ्त' में ग्रिड जा रही उपभोक्ताओं की बिजली, विधानसभा समिति ने नीति बदलने की सिफारिश की

पंजाब में सौर ऊर्जा (Solar Energy) को बढ़ावा देने के सरकारी दावों के बीच एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। प्रदेश की वर्तमान 'नेट मीटरिंग पॉलिसी' के कारण सौर ऊर्जा उत्पादकों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। पंजाब विधानसभा की संबंधित समिति ने अपनी होलिया रिपोर्ट में मौजूदा प्रावधानों को "उपभोक्ताओं के साथ अन्याय" करार देते हुए नीति में आमूल-चूल बदलाव की सिफारिश की है।

23 Mar 2026  |  99

 

चंडीगढ़ | पंजाब में सौर ऊर्जा (Solar Energy) को बढ़ावा देने के सरकारी दावों के बीच एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। प्रदेश की वर्तमान 'नेट मीटरिंग पॉलिसी' के कारण सौर ऊर्जा उत्पादकों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। पंजाब विधानसभा की संबंधित समिति ने अपनी होलिया रिपोर्ट में मौजूदा प्रावधानों को "उपभोक्ताओं के साथ अन्याय" करार देते हुए नीति में आमूल-चूल बदलाव की सिफारिश की है।

क्या है विवाद: क्यों 'शून्य' हो रही है मेहनत की बिजली?

रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में लागू मौजूदा व्यवस्था के तहत 1 अक्टूबर से 30 सितंबर तक का वार्षिक चक्र (Annual Cycle) निर्धारित है।

नुकसान का गणित: यदि कोई उपभोक्ता साल भर में अपने सोलर प्लांट से उत्पन्न पूरी बिजली का उपयोग नहीं कर पाता, तो बची हुई यूनिट्स वर्ष के अंत में स्वतः शून्य (Reset to Zero) कर दी जाती हैं।

बिना मुआवजा ग्रिड को बिजली: उपभोक्ता द्वारा उत्पादित यह अतिरिक्त बिजली बिना किसी वित्तीय लाभ या मुआवजे के सरकारी ग्रिड में चली जाती है।

विवशता: समिति ने पाया कि बठिंडा, श्री मुक्तसर साहिब और एसबीएस नगर जैसे जिलों में लोग नुकसान से बचने के लिए या तो जबरन अपनी खपत बढ़ा रहे हैं या सिस्टम को सीमित कर रहे हैं।

अघोषित पाबंदियां और पारदर्शिता का अभाव

रिपोर्ट में एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। नियमों के अनुसार उपभोक्ता अपने स्वीकृत लोड (Sanctioned Load) के 100% तक सोलर प्लांट लगा सकते हैं, लेकिन धरातल पर:

फील्ड अधिकारी केवल 70 से 80% तक ही इंस्टालेशन की अनुमति दे रहे हैं।

यह पाबंदी किसी लिखित आदेश के बजाय केवल मौखिक निर्देशों पर आधारित है।

समिति ने इस प्रवृत्ति को "मनमाना और पारदर्शिता के विपरीत" बताया है।

विधानसभा समिति की प्रमुख सिफारिशें

सौर ऊर्जा के प्रति जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए समिति ने सरकार को निम्नलिखित सुझाव दिए हैं:

यूनिट बेचने की व्यवस्था: ऐसी नीति बने जिससे उपभोक्ता अपनी अतिरिक्त बिजली ग्रिड को उचित मूल्य पर बेच सकें

कैरी फॉरवर्ड की सुविधा: वार्षिक चक्र के अंत में यूनिट्स को शून्य करने के बजाय उन्हें अगले वर्ष के लिए क्रेडिट (Carry Forward) करने की व्यवस्था हो।

नेट बिलिंग और ग्रॉस मीटरिंग: इन विकल्पों को और अधिक व्यावहारिक और उपभोक्ता-हितैषी बनाया जाए।

कृषि क्षेत्र का एकीकरण: किसानों के ट्यूबवेल कनेक्शनों को सोलर सिस्टम से जोड़ा जाए ताकि वे सिंचाई के बाद बची बिजली बेचकर अतिरिक्त आय अर्जित कर सकें।

समिति की चेतावनी: "यदि इन खामियों को समय रहते दूर नहीं किया गया, तो राज्य में नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) के विस्तार की गति धीमी पड़ सकती है और हरित ऊर्जा का लक्ष्य केवल कागजों तक सीमित रह जाएगा।"

निष्कर्ष

पंजाब में सोलर ऊर्जा का भविष्य अब सरकार के अगले कदम पर टिका है। यदि समिति की सिफारिशें मानी जाती हैं, तो न केवल उपभोक्ताओं का आर्थिक नुकसान रुकेगा, बल्कि पंजाब सौर ऊर्जा के क्षेत्र में एक मॉडल राज्य बनकर उभर सकता है।

अन्य खबरें