मध्य पूर्व में शांति की आहट? ट्रंप का बातचीत का दावा और ईरान की सख्त शर्तें

: महीनों से बारूद की गंध और धमाकों की गूँज झेल रहे मध्य पूर्व में अब कूटनीति की मेज सजती दिखाई दे रही है। दुनिया भर में मचे हाहाकार के बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच युद्ध विराम को लेकर बातचीत का सिलसिला शुरू हो गया है। हालांकि, शांति की यह राह इतनी आसान नहीं दिखती, क्योंकि ईरान ने समझौते के बदले शर्तों की एक लंबी फेहरिस्त पेश कर दी है।

25 Mar 2026  |  75

 

वाशिंगटन/तेहरान: महीनों से बारूद की गंध और धमाकों की गूँज झेल रहे मध्य पूर्व में अब कूटनीति की मेज सजती दिखाई दे रही है। दुनिया भर में मचे हाहाकार के बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच युद्ध विराम को लेकर बातचीत का सिलसिला शुरू हो गया है। हालांकि, शांति की यह राह इतनी आसान नहीं दिखती, क्योंकि ईरान ने समझौते के बदले शर्तों की एक लंबी फेहरिस्त पेश कर दी है।

ट्रंप का 'ब्रेक' और कूटनीतिक सक्रियता

राष्ट्रपति ट्रंप ने हाल ही में ईरान पर सैन्य कार्रवाई से 'ब्रेक' लेने का संकेत देते हुए कहा कि इस पूरे सप्ताह दोनों देशों के प्रतिनिधि चर्चा करेंगे। हालांकि, ट्रंप ने उन ईरानी प्रतिनिधियों के नामों का खुलासा नहीं किया है जिनसे बातचीत चल रही है, लेकिन उनके इस बयान ने वैश्विक बाजार और राजनीति में एक सकारात्मक हलचल पैदा कर दी है।

ईरान का 'कड़ा रुख': सौदेबाजी की मेज पर रखीं शर्तें

वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने केवल युद्ध विराम नहीं, बल्कि क्षेत्र की पूरी सुरक्षा व्यवस्था को बदलने की मांग की है। ईरान की मुख्य शर्तें निम्नलिखित हैं:

सैन्य वापसी: पूरे पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) से अमेरिकी सैन्य ठिकानों को पूरी तरह बंद करना।

समुद्री नियंत्रण: होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर पूर्ण नियंत्रण और वहां से गुजरने वाले जहाजों से शुल्क वसूलने का अधिकार।

सुरक्षा गारंटी: अमेरिका से यह पक्का आश्वासन कि वह भविष्य में कभी ईरान पर हमला नहीं करेगा।

आर्थिक मुआवजा: युद्ध के दौरान हुए नुकसान के लिए वित्तीय हर्जाने की मांग।

प्रतिबंधों की समाप्ति: ईरान पर लगे सभी अंतरराष्ट्रीय और अमेरिकी प्रतिबंधों को हटाना।

परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम पर लचीलापन?

दिलचस्प बात यह है कि ईरान ने कुछ रियायतों के संकेत भी दिए हैं। ईरान ने प्रस्ताव दिया है कि यदि उसकी शर्तें मानी जाती हैं, तो वह:

पांच वर्षों के लिए बैलिस्टिक मिसाइल विकास को रोक सकता है।

यूरेनियम संवर्धन की मात्रा कम करने और IAEA को निरीक्षण की अनुमति देने पर विचार कर सकता है।

क्षेत्रीय प्रॉक्सी ताकतों की फंडिंग रोकने पर भी सहमति जता सकता है।

"युद्ध तभी खत्म होगा जब ईरान के वैध अधिकारों को मान्यता मिलेगी और भविष्य के हमलों के खिलाफ पक्की अंतरराष्ट्रीय गारंटी दी जाएगी।" — मसूद पेजेश्कियन, ईरानी राष्ट्रपति

चुनौतियां और भविष्य की राह

ईरान के इस बदले हुए रुख ने दुनिया को चौंकाया है, क्योंकि इससे पहले विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने किसी भी बातचीत से इनकार किया था। ईरान का मानना है कि परमाणु वार्ताओं के बीच हमला करके अमेरिका ने विश्वास तोड़ा है। अब गेंद अमेरिका और उसके सहयोगी इजरायल के पाले में है। क्या अमेरिका मध्य पूर्व से अपने पैर खींचने की ईरान की शर्त को स्वीकार करेगा? यह आने वाले हफ्तों की सबसे बड़ी कूटनीतिक पहेली होगी।

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