"हार को समझौते का नाम न दे अमेरिका": ईरानी सेना ने वाशिंगटन के शांति प्रयासों का उड़ाया मज़ाक

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ईरान और अमेरिका के रिश्तों में तल्खी और बढ़ गई है। ईरानी सेना के 'खातम अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर' के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल इब्राहिम जोल्फगारी ने अमेरिका द्वारा प्रस्तावित संघर्ष-विराम (Ceasefire) की कोशिशों पर कड़ा प्रहार किया है। सरकारी टेलीविजन पर प्रसारित एक वीडियो संदेश में उन्होंने अमेरिकी कूटनीति का उपहास उड़ाते हुए इसे 'खुद से की जाने वाली बातचीत' करार दिया।

25 Mar 2026  |  76

 

तेहरान: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ईरान और अमेरिका के रिश्तों में तल्खी और बढ़ गई है। ईरानी सेना के 'खातम अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर' के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल इब्राहिम जोल्फगारी ने अमेरिका द्वारा प्रस्तावित संघर्ष-विराम (Ceasefire) की कोशिशों पर कड़ा प्रहार किया है। सरकारी टेलीविजन पर प्रसारित एक वीडियो संदेश में उन्होंने अमेरिकी कूटनीति का उपहास उड़ाते हुए इसे 'खुद से की जाने वाली बातचीत' करार दिया।

"महाशक्ति का दावा अब एक रणनीतिक विफलता"

लेफ्टिनेंट कर्नल जोल्फगारी ने सीधे तौर पर अमेरिकी सैन्य शक्ति और उसकी वैश्विक साख पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा:

"जिस रणनीतिक शक्ति का आप कभी दंभ भरा करते थे, वह अब पूरी तरह से एक विफलता में बदल चुकी है। अगर अमेरिका वास्तव में वह वैश्विक महाशक्ति होता जिसका वह दावा करता है, तो वह अब तक इस दलदल से बाहर निकल चुका होता।"

उन्होंने आगे चेतावनी देते हुए कहा कि अमेरिका को अपनी सैन्य और कूटनीतिक हार को 'समझौते' का मुलम्मा चढ़ाकर पेश नहीं करना चाहिए।

15-सूत्रीय योजना पर तीखा पलटवार

यह बयान तब आया है जब हाल ही में ट्रंप प्रशासन द्वारा पाकिस्तान के माध्यम से ईरान को 15-सूत्रीय संघर्ष-विराम योजना भेजी गई थी। इस प्रस्ताव पर तंज कसते हुए जोल्फगारी ने पूछा, "क्या आपके आंतरिक मतभेद इस हद तक बढ़ गए हैं कि अब आप (अमेरिका) केवल खुद से ही संवाद कर रहे हैं?" ईरानी प्रवक्ता के अनुसार, अमेरिका के 'खोखले वादों' का दौर अब समाप्त हो चुका है और उसकी बातों पर अब कोई भरोसा नहीं रह गया है।

समझौते की गुंजाइश खत्म

ईरान के कड़े रुख को दोहराते हुए प्रवक्ता ने स्पष्ट कर दिया कि तेहरान झुकने वाला नहीं है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा:

स्थिर रुख: ईरान का रुख पहले दिन से स्पष्ट है और इसमें कोई बदलाव नहीं आएगा।

कोई वार्ता नहीं: "हमारे जैसा कोई भी व्यक्ति, आप जैसे (अमेरिकी प्रशासन) किसी व्यक्ति के साथ कभी समझौता नहीं करेगा—न आज और न ही भविष्य में।"

निष्कर्ष

ईरानी सेना का यह बयान न केवल अमेरिका के शांति प्रस्तावों को खारिज करता है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि आने वाले समय में दोनों देशों के बीच गतिरोध और गहरा सकता है। जहाँ अमेरिका पाकिस्तान जैसे माध्यमों से मेज पर आने की कोशिश कर रहा है, वहीं ईरान इसे अपनी जीत और अमेरिका की विवशता के रूप में देख रहा है।

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