पंचकूला: हरियाणा के पंचकूला में बैंकिंग सेक्टर की सुरक्षा और साख पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा हो गया है। चंडीगढ़ के आईडीएफसी फर्स्ट बैंक (IDFC First Bank) घोटाले की गूँज अभी थमी भी नहीं थी कि अब कोटक महिंद्रा बैंक की पंचकूला शाखा में नगर निगम (MC) के 150 करोड़ रुपये से अधिक की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में भारी धोखाधड़ी का मामला सामने आया है।
कैसे खुला धोखाधड़ी का खेल?
यह पूरा मामला तब प्रकाश में आया जब पंचकूला नगर निगम ने अपनी एक परिपक्व (Mature) हो चुकी एफडीआर (FDR) की राशि को स्थानांतरित करने के लिए बैंक से संपर्क किया। नगर निगम के रिकॉर्ड और बैंक के खातों के मिलान के दौरान अधिकारियों के होश उड़ गए।
नगर निगम आयुक्त विनय कुमार ने 24 मार्च को पुष्टि करते हुए बताया:
“नगर निगम की कई एफडीआर लंबे समय से कोटक महिंद्रा बैंक की सेक्टर-11 शाखा में जमा थीं। जब एक एफडीआर की अवधि पूरी होने पर हमने फंड ट्रांसफर करने को कहा, तब बैंक रिकॉर्ड और हमारे डेटा में 150 करोड़ रुपये से अधिक का अंतर पाया गया।”
बैंक की प्रतिक्रिया और FIR
मामले की गंभीरता को देखते हुए कोटक महिंद्रा बैंक ने भी कदम उठाए हैं। बैंक प्रबंधन ने इस संबंध में एफआईआर (FIR) दर्ज कराई है और नगर निगम के खातों के विस्तृत ऑडिट और मिलान की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
बैंक का दावा: कोटक महिंद्रा बैंक का कहना है कि सभी लेन-देन और खाते उचित बैंकिंग प्रक्रियाओं और नियामक आवश्यकताओं (Regulatory requirements) के तहत संचालित किए गए थे।
आंतरिक जांच: बैंक अब यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि क्या इस गबन के पीछे कोई तकनीकी खामी है या बैंक के ही किसी कर्मचारी की मिलीभगत।
निगम की वित्तीय सुरक्षा पर सवाल
प्राइवेट बैंकों में एक के बाद एक सामने आ रहे इन घोटालों ने सरकारी संस्थाओं की चिंता बढ़ा दी है। पंचकूला नगर निगम ने अपनी जमा पूंजी को सुरक्षित रखने के लिए निजी बैंक का चयन किया था, लेकिन अब 150 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
प्रमुख बिंदु: एक नजर में
संस्थान: पंचकूला नगर निगम (Panchkula MC)।
बैंक: कोटक महिंद्रा बैंक, सेक्टर-11, पंचकूला।
घोटाले की राशि: ₹150 करोड़ से अधिक।
वर्तमान स्थिति: एफआईआर दर्ज, बैंक और निगम के बीच खातों का मिलान जारी।