मुंबई: पश्चिम एशिया में गहराते युद्ध के बाद वैश्विक अर्थव्यवस्था में मची उथल-पुथल को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भारतीय बैंकिंग प्रणाली को सुरक्षित रखने के लिए कड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। केंद्रीय बैंक ने सभी सरकारी और निजी बैंकों को निर्देश दिया है कि वे पश्चिम एशिया (West Asia) में अपने प्रत्यक्ष और परोक्ष (Indirect) निवेश और जोखिम (Exposure) की विस्तृत जानकारी तुरंत साझा करें।
क्यों चिंतित है रिजर्व बैंक?
ईरान-अमेरिका संघर्ष के कारण दुनिया भर के लगभग 2.5 ट्रिलियन डॉलर के बॉन्ड मार्केट में भारी हलचल है। भारत के लिए यह क्षेत्र न केवल ऊर्जा सुरक्षा (LPG और तेल) बल्कि रेमिटेंस (विदेश से आने वाला पैसा) और निर्यात के लिहाज से भी रीढ़ की हड्डी माना जाता है। RBI यह समझना चाहता है कि युद्ध के कारण बैंकों की बैलेंस शीट पर कितना दबाव आ सकता है।
इन क्षेत्रों पर मंडरा रहा है खतरा
बैंकिंग सूत्रों के अनुसार, RBI ने मुख्य रूप से तीन स्तरों पर डेटा मांगा है:
कॉर्पोरेट एक्सपोज़र: ऐसी भारतीय कंपनियां जिनका बड़ा कारोबार या प्रोजेक्ट्स पश्चिम एशिया में चल रहे हैं।
इंपोर्ट-एक्सपोर्ट: वहां के देशों के साथ व्यापार करने वाली कंपनियों के फंसे हुए पेमेंट्स और क्रेडिट लिमिट।
रिटेल और एनआरआई: खाड़ी देशों में रह रहे भारतीयों के होम लोन और अन्य व्यक्तिगत ऋणों की स्थिति।
अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाला 'ट्रिपल अटैक'
1. महंगाई का तड़का (Imported Inflation)
कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति बाधित होने से ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स की लागत बढ़ गई है। बैंकरों का मानना है कि इससे भारत में 'आयातित महंगाई' बढ़ सकती है, जिसका सीधा असर आम उपभोक्ता की जेब पर पड़ेगा।
2. रेमिटेंस में गिरावट की आशंका
वित्त वर्ष 2024 में भारत को मिले कुल 119 अरब डॉलर के रेमिटेंस में से लगभग 38% हिस्सा खाड़ी (GCC) देशों से आया था। युद्ध के कारण वहां काम कर रहे भारतीयों की आय प्रभावित होने से भारत के रियल एस्टेट और घरेलू खर्च में कमी आने का डर है।
3. MSME और एक्सपोर्ट को झटका
निर्यातकों का अनुमान है कि यदि तनाव जारी रहा, तो भारत के निर्यात को 8-10 अरब डॉलर का नुकसान हो सकता है। गुजरात के मोरबी सिरेमिक उद्योग जैसे क्षेत्रों में काम बंद होने की खबरें पहले ही आनी शुरू हो गई हैं। सबसे ज्यादा दबाव छोटे और मझोले उद्योगों (MSME) पर है, जिनके पास बड़े संकट को झेलने के लिए पर्याप्त पूंजी नहीं है।
विशेषज्ञ की राय: "यदि संकट लंबा खिंचता है, तो RBI को 2020 की तरह मोरेटोरियम (कर्ज भुगतान में राहत) या इमरजेंसी क्रेडिट लाइन जैसे असाधारण कदम उठाने पड़ सकते हैं।"
संकट के संकेत: एक नजर में
| क्षेत्र | प्रभाव |
|---|---|
| ऊर्जा | LPG और उर्वरक (Fertilizer) की कमी शुरू; लागत में वृद्धि। |
| मुद्रा | रुपये को गिरने से बचाने के लिए RBI को विदेशी मुद्रा भंडार का उपयोग करना पड़ सकता है। |
| बैंकिंग | FY27 की पहली तिमाही (Q1) की बैलेंस शीट पर NPA बढ़ने का खतरा। |