"विदेश नीति अमेरिका के पास गिरवी": सर्वदलीय बैठक से पहले सपा सांसद अवधेश प्रसाद का पीएम मोदी पर बड़ा हमला

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और उसके कारण भारत में उत्पन्न ऊर्जा संकट पर चर्चा के लिए केंद्र सरकार द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक से पहले सियासत गरमा गई है। अयोध्या से समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार ने कदम उठाने में बहुत देर कर दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत की मौजूदा विदेश नीति स्वतंत्र होने के बजाय अमेरिकी दबाव में काम कर रही है।

25 Mar 2026  |  75

 

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और उसके कारण भारत में उत्पन्न ऊर्जा संकट पर चर्चा के लिए केंद्र सरकार द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक से पहले सियासत गरमा गई है। अयोध्या से समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार ने कदम उठाने में बहुत देर कर दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत की मौजूदा विदेश नीति स्वतंत्र होने के बजाय अमेरिकी दबाव में काम कर रही है।

"देर आए दुरुस्त आए, पर संकट पहले टालना था"

सांसद अवधेश प्रसाद ने तंज कसते हुए कहा, "देर आए दुरुस्त आए।" उन्होंने तर्क दिया कि जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से अनावश्यक दखलंदाजी शुरू हुई थी, तभी सरकार को विपक्ष के साथ बैठकर रणनीति बनानी चाहिए थी।

अवधेश प्रसाद का मुख्य आरोप: "आज ऐसा प्रतीत होता है कि हमारे देश की विदेश नीति संयुक्त राज्य अमेरिका के पास गिरवी रख दी गई है। पीएम मोदी को देश की वास्तविक स्थिति पर विचार करना चाहिए था, न कि केवल बाहरी दबाव में फैसले लेने चाहिए थे।"

सर्वदलीय बैठक का एजेंडा

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और विदेश मंत्री एस. जयशंकर की अध्यक्षता में बुलाई गई इस उच्च स्तरीय बैठक में निम्नलिखित मुद्दों पर चर्चा संभावित है:

ईरान-इजरायल युद्ध: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत की रणनीति।

ऊर्जा संकट: कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति बाधित होने से देश में बढ़ती महंगाई और किल्लत।

विपक्षी सुझाव: सरकार को घेरने के लिए विपक्ष ने पहले ही संकेत दे दिए हैं कि वे इस मुद्दे को हल्के में नहीं लेंगे।

संसद से सड़क तक विपक्ष हमलावर

गौरतलब है कि सोमवार को लोकसभा और मंगलवार को राज्यसभा में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा दिए गए बयानों से विपक्ष संतुष्ट नजर नहीं आ रहा है। विपक्षी दलों का साझा आरोप है कि:

सरकार ने समय रहते ऊर्जा सुरक्षा के लिए कोई ठोस वैकल्पिक कदम नहीं उठाए।

भारत की पारंपरिक गुटनिरपेक्ष नीति अमेरिकी प्रशासन (विशेषकर ट्रंप प्रशासन) के प्रभाव के कारण कमजोर हुई है।

निष्कर्ष: बैठक पर टिकी निगाहें

सपा सांसद ने उम्मीद जताई है कि सरकार अब कम से कम विपक्ष के सुझावों को 'सही भावना' से लेगी और उन पर अमल करेगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बैठक के नतीजे न केवल देश की आंतरिक ऊर्जा नीति, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की बदलती भूमिका को भी स्पष्ट करेंगे।

एक नजर में: विवाद के केंद्र बिंदु

वक्ता: अवधेश प्रसाद (सांसद, अयोध्या)।

आरोप: विदेश नीति का अमेरिकीकरण और ऊर्जा संकट पर देरी से एक्शन।

संदर्भ: पश्चिम एशिया संघर्ष (ईरान-इजरायल युद्ध) और डोनाल्ड ट्रंप का हस्तक्षेप।

बैठक की अध्यक्षता: राजनाथ सिंह और एस. जयशंकर।

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