तेहरान/वाशिंगटन: खाड़ी क्षेत्र में युद्ध के बादल अब और गहरे होते जा रहे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच जारी वर्चस्व की जंग अब एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुँच गई है। ताजा खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने अपने रणनीतिक और आर्थिक रूप से सबसे महत्वपूर्ण 'खार्ग द्वीप' की सुरक्षा को इतना कड़ा कर दिया है कि वह अब एक अभेद्य सैन्य दुर्ग में तब्दील हो चुका है।
आर्थिक लाइफलाइन पर कब्जे की बिसात
खार्ग द्वीप ईरान के लिए किसी 'गोल्डन डक' से कम नहीं है। यह द्वीप ईरान के कुल कच्चे तेल के निर्यात का लगभग 90% हिस्सा संभालता है। रिपोर्टों के अनुसार, ट्रम्प प्रशासन इस द्वीप पर जमीनी कार्रवाई कर इसे अपने नियंत्रण में लेने की गंभीर योजना बना रहा है। अमेरिका का मानना है कि यदि वह इस द्वीप को अपने कब्जे में ले लेता है, तो वह ईरान को 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' (Hormuz Strait) फिर से खोलने और अपनी शर्तों पर समझौता करने के लिए मजबूर कर सकेगा।
ईरान का पलटवार: बिछाया मौत का जाल
अमेरिका की संभावित घेराबंदी की भनक लगते ही ईरानी सेना ने द्वीप की सुरक्षा को कई परतों में बाँट दिया है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार:
समुद्री बारूदी सुरंगें: द्वीप के उन तटों पर भारी मात्रा में 'एंटी-पर्सनल' और 'एंटी-आर्मर' माइन्स बिछाई गई हैं, जहाँ अमेरिकी उभयचर वाहन लैंड कर सकते हैं।
हवाई सुरक्षा: पिछले कुछ हफ्तों में यहाँ कंधे पर रखकर दागी जाने वाली मिसाइल प्रणालियों (MANPADs) की तैनाती कई गुना बढ़ा दी गई है, ताकि अमेरिकी हेलीकॉप्टरों और कम ऊंचाई पर उड़ने वाले विमानों को निशाना बनाया जा सके।
"इस द्वीप पर हमला करना अमेरिका के लिए आत्मघाती हो सकता है। वहां बिछाया गया बारूदी सुरंगों का जाल और मिसाइलों की तैनाती अमेरिकी सैनिकों के लिए भारी जानमाल के नुकसान का कारण बन सकती है।" — रक्षा विश्लेषक
पुरानी टीस और बदलती रणनीति
ज्ञात हो कि 13 मार्च को अमेरिकी सेना ने इसी द्वीप पर भीषण हवाई हमले किए थे, जिसमें 90 ठिकानों को ध्वस्त करने का दावा किया गया था। तब राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा था कि उन्होंने 'शालीनता' दिखाते हुए तेल के बुनियादी ढांचे को छोड़ दिया था। लेकिन अब रणनीति पूरी तरह बदलती दिख रही है।
अपनों के ही बीच उठते सवाल
दिलचस्प बात यह है कि राष्ट्रपति ट्रम्प के इस संभावित सैन्य कदम पर उनके अपने ही सहयोगी सवाल उठा रहे हैं। सैन्य रणनीतिकारों का एक धड़ा मानता है कि केवल खार्ग द्वीप पर कब्जा करने से 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' का संकट हल नहीं होगा, बल्कि इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में और अधिक अस्थिरता आएगी और युद्ध लंबा खिंच सकता है।
वर्तमान स्थिति: जबकि अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने इस मुद्दे पर चुप्पी साध रखी है, खाड़ी क्षेत्र में बढ़ती सैन्य हलचल ने पूरी दुनिया की धड़कनें तेज कर दी हैं। क्या यह तनाव एक व्यापक युद्ध की शुरुआत है या केवल मनोवैज्ञानिक दबाव की राजनीति? यह आने वाला वक्त ही बताएगा।