चंडीगढ़: डीएम रंधावा आत्महत्या मामले ने अब पंजाब की राजनीति में एक नया और बेहद आक्रामक मोड़ ले लिया है। कांग्रेस के भीतर मतभेदों के भाजपा के आरोपों पर पलटवार करते हुए पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने अब खुलकर सीबीआई (CBI) जांच का समर्थन कर दिया है। वड़िंग के इस रुख के बाद अब गेंद केंद्र सरकार के पाले में चली गई है।
भाजपा के 'फूट' वाले वार पर वड़िंग का पलटवार
बीते कुछ दिनों से भारतीय जनता पार्टी लगातार कांग्रेस को घेर रही थी। भाजपा का आरोप था कि रंधावा मामले में कांग्रेस दो धड़ों में बंटी हुई है और केवल चार सांसद ही सीबीआई जांच चाहते हैं। भाजपा ने राज्य सरकार की मंशा पर भी सवाल उठाए थे।
इन आरोपों का जवाब देते हुए राजा वड़िंग ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर सीधे केंद्र सरकार को चुनौती दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि भाजपा केवल उनकी 'मंजूरी' के बहाने जांच रोक रही है, तो वह बाधा अब दूर हो चुकी है।
राजा वड़िंग का कड़ा संदेश: > "यदि भारतीय जनता पार्टी केवल मेरी अनुमति का इंतजार कर रही है, तो कृपया आगे बढ़ें। डीएम रंधावा आत्महत्या मामले में सीबीआई जांच के आदेश दें। परिवार इसकी मांग कर रहा है और सच को इसकी जरूरत है। अब और देरी नहीं, अब और बहाने नहीं। केवल न्याय चाहिए।"
क्यों गरमाया है मामला?
डीएम रंधावा का सुसाइड केस एक बेहद संवेदनशील मुद्दा बन चुका है। मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
परिवार की मांग: मृतक रंधावा का परिवार शुरू से ही निष्पक्ष जांच और न्याय की गुहार लगा रहा है।
सियासी दबाव: भाजपा इसे राज्य सरकार की विफलता बता रही है, जबकि कांग्रेस अब इसे केंद्र की जिम्मेदारी बताकर घेराबंदी कर रही है।
सच्चाई की तलाश: दोनों ही दल अब इस बात पर सहमत दिख रहे हैं कि राज्य पुलिस के बजाय केंद्रीय एजेंसी से जांच कराना ही उचित होगा ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।
अब केंद्र के फैसले पर टिकी नजरें
राजा वड़िंग के इस बयान ने कांग्रेस की स्थिति को स्पष्ट कर दिया है और भाजपा के "अंतर्कलह" वाले नैरेटिव को कमजोर करने की कोशिश की है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अब केंद्र सरकार पर दबाव बढ़ गया है कि वह जल्द से जल्द केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को मामला सौंपने का निर्णय ले।
निष्कर्ष: रंधावा केस अब केवल एक कानूनी मामला नहीं, बल्कि पंजाब की सियासत का केंद्र बिंदु बन गया है। जहाँ एक ओर परिवार न्याय की आस में बैठा है, वहीं दूसरी ओर पार्टियाँ एक-दूसरे को कटघरे में खड़ा करने का कोई मौका नहीं छोड़ रही हैं।