मुंबई/टोक्यो: मध्य पूर्व (Middle East) में ईरान और अमेरिका के बीच गहराते युद्ध और कूटनीतिक अनिश्चितता का सीधा असर वैश्विक वित्तीय बाजारों पर दिखने लगा है। गुरुवार को एशियाई शेयर बाजारों में भारी बिकवाली देखी गई, जबकि युद्ध की आहट ने कच्चे तेल की कीमतों को एक बार फिर आसमान पर पहुंचा दिया है। निवेशक इस समय 'वेट एंड वॉच' (Wait and Watch) की रणनीति अपना रहे हैं।
एशियाई बाजारों में लाल निशान: प्रमुख सूचकांकों का हाल
ईरान से जुड़ी युद्ध की खबरों और शांति वार्ता की अस्पष्टता ने निवेशकों के मनोबल को प्रभावित किया है। गुरुवार को प्रमुख एशियाई बाजारों का प्रदर्शन इस प्रकार रहा:
| सूचकांक | देश | गिरावट/बढ़त | वर्तमान स्तर |
|---|---|---|---|
| निक्केई 225 | जापान | ▼ 0.3% | 53,607.75 |
| कोस्पी (KOSPI) | दक्षिण कोरिया | ▼ 1.9% | 5,537.30 |
| हैंग सेंग | हांगकांग | ▼ 1.4% | 24,978.71 |
| शंघाई कंपोजिट | चीन | ▼ 0.6% | 3,909.16 |
| S&P/ASX 200 | ऑस्ट्रेलिया | ▼ 0.2% | - |
| ताइएक्स (Taiex) | ताइवान | ▲ 0.4% | - |
कच्चे तेल में उबाल: $100 के करीब ब्रेंट क्रूड
युद्ध की स्थिति ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को लेकर डर पैदा कर दिया है। गुरुवार को शुरुआती गिरावट के बाद तेल की कीमतों में अचानक 1.3% का उछाल आया।
ब्रेंट क्रूड: अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड बढ़कर 98.51 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है।
WTI क्रूड: अमेरिकी मानक क्रूड में भी 1.6% की तेजी रही और यह 91.75 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर तनाव और बढ़ा, तो तेल की कीमतें $110 का स्तर भी पार कर सकती हैं।
अमेरिकी बाजार (Wall Street) का रुख
एशिया के विपरीत, बुधवार को अमेरिकी बाजार बढ़त के साथ बंद हुए थे। एसएंडपी 500 में 0.5% और डाउ जोन्स में 0.7% की तेजी देखी गई थी। हालांकि, गुरुवार को अमेरिकी वायदा बाजार (Futures) में 0.1% की मामूली गिरावट दर्ज की गई है, जो वैश्विक अनिश्चितता के संकेतों को दर्शाता है।
सोना-चांदी और मुद्रा बाजार
सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने और चांदी में गुरुवार सुबह थोड़ी गिरावट दर्ज की गई:
सोना: 0.8% गिरकर 4,513.90 डॉलर प्रति औंस।
चांदी: 0.9% की गिरावट के साथ 71.97 डॉलर प्रति औंस।
मुद्रा: जापानी येन के मुकाबले डॉलर थोड़ा कमजोर होकर 159.42 पर आ गया, जबकि यूरो में मामूली मजबूती देखी गई।
विशेषज्ञ की राय: "जब तक ईरान और अमेरिका के बीच जमीनी हकीकत साफ नहीं होती और हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर संकट बना रहता है, तब तक बाजारों में उतार-चढ़ाव (Volatility) जारी रहेगा। निवेशकों को इस समय रक्षा और ऊर्जा क्षेत्र के शेयरों पर नजर रखनी चाहिए।"
निष्कर्ष: वैश्विक बाजार इस समय पूरी तरह से भू-राजनीतिक (Geopolitical) घटनाओं के अधीन हैं। पाकिस्तान में होने वाली प्रस्तावित शांति वार्ता के परिणाम बाजार की अगली दिशा तय करेंगे।