नक्सलबाड़ी से ममता की हुंकार: "वोटर लिस्ट से 8 लाख नाम हटाना सोची-समझी साजिश, बंगाल में नहीं होने देंगे NRC"

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी ने बुधवार को उत्तर बंगाल से अपने चुनावी अभियान का शंखनाद किया। नक्सलबाड़ी, मयनागुड़ी और डबग्राम-फुलबाड़ी में आयोजित तीन बड़ी जनसभाओं में उन्होंने चुनाव आयोग और भाजपा पर तीखे प्रहार किए। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) के नाम पर लाखों वैध मतदाताओं के लोकतांत्रिक अधिकारों को छीना जा रहा है।

26 Mar 2026  |  82

 

नक्सलबाड़ी/सिलीगुड़ी: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी ने बुधवार को उत्तर बंगाल से अपने चुनावी अभियान का शंखनाद किया। नक्सलबाड़ी, मयनागुड़ी और डबग्राम-फुलबाड़ी में आयोजित तीन बड़ी जनसभाओं में उन्होंने चुनाव आयोग और भाजपा पर तीखे प्रहार किए। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) के नाम पर लाखों वैध मतदाताओं के लोकतांत्रिक अधिकारों को छीना जा रहा है।

वोटर लिस्ट और 8 लाख का आंकड़ा: "अन्याय बर्दाश्त नहीं"

ममता बनर्जी ने दावा किया कि पहली पूरक मतदाता सूची (First Supplementary List) जारी होने के साथ ही एक झटके में 8 लाख मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं।

विचाराधीन मतदाता: 28 फरवरी को प्रकाशित 'प्रारंभिक फाइनल लिस्ट' में लगभग 27 लाख मतदाताओं को 'विचाराधीन' (Adjudication) श्रेणी में रखा गया था।

आरोप: मुख्यमंत्री ने कहा, "मुझे बताया गया है कि इन 27 लाख में से 8 लाख लोगों के नाम काट दिए गए हैं। यह एक बेहद खराब तरीके से नियोजित SIR अभ्यास था।"

पारदर्शिता की मांग: उन्होंने चुनाव आयोग से मांग की कि पूरी सूची को जल्द से जल्द सार्वजनिक किया जाए। उन्होंने यह भी शिकायत की कि अभी तक सरकारी कार्यालयों में पूरक सूची की हार्ड कॉपियां उपलब्ध नहीं कराई गई हैं।

NRC और डिटेंशन कैंप पर सख्त रुख

नक्सलबाड़ी की सभा में ममता बनर्जी ने मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को NRC (राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर) की आहट बताया।

समुदायों को निशाना: उन्होंने आरोप लगाया कि विभिन्न समुदायों के लोगों के नाम जानबूझकर हटाए जा रहे हैं।

प्रतिबद्धता: ममता ने स्पष्ट शब्दों में कहा, "वे बंगाल में NRC लागू करने की योजना बना रहे हैं, लेकिन हम ऐसा नहीं होने देंगे। बंगाल की धरती पर एक भी डिटेंशन कैंप (बंदी गृह) नहीं बनने दिया जाएगा।"

"बंगाल के विभाजन की साजिश"

भाजपा पर विभाजनकारी राजनीति का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से उन्हें जानकारी मिली है कि भाजपा उत्तर बंगाल और बिहार के कुछ जिलों को मिलाकर एक अलग राज्य बनाने की योजना बना रही है। उन्होंने संकल्प लिया कि वह बंगाल का एक और बंटवारा कभी नहीं होने देंगी।

कल्याणकारी योजनाओं पर 'ब्रेक' का डर

ममता बनर्जी ने जनता को आगाह किया कि यदि भाजपा सत्ता में आती है, तो उनके द्वारा शुरू की गई जनहितैषी योजनाएं बंद कर दी जाएंगी।

लक्ष्मी भंडार और युवा साथी: उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने 100 से अधिक योजनाएं (जैसे लक्ष्मी भंडार) शुरू की हैं, जो हर वर्ग के लिए हैं, जबकि केंद्र की योजनाएं चुनिंदा लोगों तक ही सीमित रहती हैं।

"जिन लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं, हमारी पार्टी उनकी हरसंभव मदद करेगी ताकि उन्हें दोबारा मतदाता के रूप में पंजीकृत किया जा सके। कोई भी वास्तविक नागरिक मतदान से वंचित नहीं रहना चाहिए।" — ममता बनर्जी

राजनीतिक विश्लेषण: जानकारों का मानना है कि ममता बनर्जी का NRC और मतदाता सूची पर यह कड़ा रुख अल्पसंख्यक और सीमावर्ती समुदायों के वोट बैंक को एकजुट रखने की एक सोची-समझी रणनीति है। उत्तर बंगाल में भाजपा के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए उन्होंने 'बंगाल विभाजन' और 'योजनाएं बंद होने' के भावनात्मक मुद्दों को हथियार बनाया है।

अन्य खबरें