नई दिल्ली: मध्य पूर्व में जारी युद्ध और वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच भारत सरकार ने आम जनता और तेल कंपनियों को बड़ी राहत दी है। सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर लगने वाले स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (SAID) में भारी कटौती की घोषणा की है। इस कदम का उद्देश्य वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के असर को घरेलू बाजार में कम करना है।
एक्साइज ड्यूटी में बदलाव: एक नजर में
सरकार द्वारा किए गए टैक्स संशोधन के बाद नई दरें इस प्रकार हैं:
| ईंधन का प्रकार | पुरानी ड्यूटी (प्रति लीटर) | नई ड्यूटी (प्रति लीटर) | कुल कटौती |
|---|---|---|---|
| पेट्रोल | ₹13 | ₹3 | ₹10 की कमी |
| डीजल | ₹10 | शून्य (0) | ₹10 की कमी |
एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के लिए नया ढांचा
हवाई ईंधन के लिए सरकार ने एक नया लेवी ढांचा पेश किया है। एटीएफ पर अब ₹50 प्रति लीटर का विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लगाया गया है, लेकिन विशिष्ट प्रावधानों और छूट के बाद इसका प्रभावी शुल्क लगभग ₹29.5 प्रति लीटर रहेगा।
क्यों लिया गया यह फैसला?
इस कटौती के पीछे मुख्य कारण वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति श्रृंखला में आने वाली बाधाएं हैं:
होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की नाकाबंदी: ईरान और अमेरिका-इजरायल संघर्ष के कारण इस महत्वपूर्ण जलमार्ग पर संकट मंडरा रहा है। दुनिया की लगभग 20-25% कच्चे तेल की आपूर्ति इसी मार्ग से होती है।
भारत पर प्रभाव: संघर्ष से पहले भारत अपनी जरूरत का 12-15% कच्चा तेल इसी गलियारे से आयात करता था।
लागत में कमी: इस कटौती से तेल विपणन कंपनियों (OMCs) पर पड़ रहा आर्थिक बोझ कम होगा, जिससे आम आदमी के लिए पेट्रोल-डीजल की कीमतों में स्थिरता आने या कमी होने की उम्मीद है।
निर्यात लाभों पर सख्ती
एक तरफ जहाँ घरेलू राहत दी गई है, वहीं दूसरी ओर सरकार ने ईंधन निर्यात के नियमों को कड़ा कर दिया है। पेट्रोल, डीजल और एटीएफ के निर्यात पर पहले मिलने वाली व्यापक उत्पाद शुल्क छूट को वापस ले लिया गया है। अब निर्यात लाभ केवल विशिष्ट श्रेणियों तक ही सीमित रहेंगे, जिससे देश के भीतर ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।
विशेष नोट: हाल ही में निजी कंपनी 'नायरा' ने कीमतों में बढ़ोतरी की है, लेकिन सरकारी कंपनियों ने अभी केवल प्रीमियम पेट्रोल के दाम बढ़ाए हैं। इस टैक्स कटौती के बाद आम पेट्रोल-डीजल की कीमतों में राहत मिलने की प्रबल संभावना है।