पानीपत/चंडीगढ़: हरियाणा में रबी सीजन 2026-27 के लिए फसलों की सरकारी खरीद का काउंटडाउन शुरू हो गया है। कल यानी 28 मार्च से सरसों की खरीद शुरू होने जा रही है, जबकि 1 अप्रैल से गेहूं की सरकारी खरीद का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि, सीजन की शुरुआत से पहले ही मंडियों में समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं। जहाँ एक ओर सरसों के ऊंचे बाजार भाव ने सरकारी खरीद की चमक फीकी कर दी है, वहीं दूसरी ओर मंडियों में बुनियादी सुविधाओं और नए डिजिटल नियमों को लेकर भारी असंतोष व्याप्त है।
सरसों: MSP से 800 रुपये ऊपर तक पहुंच रहे भाव
इस बार सरसों के किसानों के लिए बाजार से अच्छी खबरें आ रही हैं। सरकार ने सरसों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 6200 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है, लेकिन निजी खरीदार मंडियों में 6500 से 7000 रुपये तक की बोली लगा रहे हैं।
प्रमुख जिलों का हाल: फतेहाबाद, कैथल और भिवानी में प्राइवेट खरीद हावी है।
प्रभाव: ऊंचे भाव और नमी की शर्तों में ढील के कारण किसान सरकारी केंद्रों के बजाय सीधे प्राइवेट मिलरों को फसल बेचना पसंद कर रहे हैं। इससे इस बार सरकारी आवक सीमित रहने के आसार हैं।
व्यवस्थाओं की पोल खोलती मंडियां: बारदाना और टेंडर गायब
गेहूं की बंपर पैदावार (114.62 लाख मीट्रिक टन) के अनुमान के बीच प्रशासनिक तैयारियां सुस्त नजर आ रही हैं।
बुनियादी ढांचा: करनाल, कैथल और यमुनानगर की मंडियों में सड़कें टूटी हैं, सफाई व्यवस्था ठप है और पीने के पानी व लाइट की सुविधा अधूरी है।
लॉजिस्टिक संकट: कई जिलों में अभी तक बारदाना (बोले) नहीं पहुंचा है। उठान और ट्रांसपोर्टेशन के टेंडर अब भी लंबित हैं, जिससे फसल के अंबार लगने का डर है।
स्टाफ की कमी: झज्जर और अंबाला जैसे केंद्रों पर खरीद प्रबंधन के लिए पर्याप्त स्टाफ उपलब्ध नहीं है।
डिजिटल नियमों पर 'जंग': आढ़ती और किसान लामबंद
इस बार सरकार ने पारदर्शिता के नाम पर कई सख्त गाइडलाइन जारी की हैं, जिनका कड़ा विरोध हो रहा है:
बायोमेट्रिक सत्यापन: गेट पास के लिए किसानों की बायोमेट्रिक उपस्थिति अनिवार्य है।
जियो-फेंसिंग: ई-खरीद पोर्टल को जियो-फेंसिंग से जोड़ा गया है ताकि गेट पास मंडी परिसर के भीतर ही कटें।
ट्रैक्टर-ट्रॉली फोटो: बिना वैध नंबर प्लेट और फोटो के वाहनों को प्रवेश नहीं मिलेगा।
विरोध का स्वर: आढ़ती संगठनों का कहना है कि पीक सीजन में इंटरनेट की समस्या और इन जटिल प्रक्रियाओं से मंडियों में जाम की स्थिति पैदा होगी और किसानों की परेशानी बढ़ेगी।
लक्ष्य और अनुमान: एक नजर में (2026-27)
| फसल | उत्पादन अनुमान (लाख मीट्रिक टन) | सरकारी खरीद लक्ष्य (लाख मीट्रिक टन) |
|---|---|---|
| गेहूं | 114.62 | 70.00 |
| सरसों | 13.17 | (पिछले वर्ष 8.12 खरीद हुई थी) |
| सूरजमुखी | 0.70 | -- |
| मूंग | 0.98 | -- |
प्रशासनिक दावा: "सब ठीक होगा"
विभिन्न जिलों के उपायुक्त (DC) लगातार समीक्षा बैठकें कर रहे हैं। फतेहाबाद के उपायुक्त डॉ. विवेक भारती ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि किसानों को मंडी में रुकना न पड़े और भुगतान समय पर सुनिश्चित हो। हालांकि, धरातल पर टूटी सड़कें और खाली शेड दावों की हकीकत बयां कर रहे हैं।
निष्कर्ष:
बंपर फसल की खुशी के बीच अव्यवस्था और डिजिटल नियमों का पेच इस खरीद सीजन को चुनौतीपूर्ण बना सकता है। अब देखना यह होगा कि 28 मार्च से शुरू हो रही प्रक्रिया में सरकार किसानों का विश्वास कितना जीत पाती है।