हरियाणा : भिवानी मंडी में सरसों की खरीद पर 'गुणवत्ता' का ग्रहण: प्राइवेट लैब की जांच पर किसानों ने उठाए सवाल, सरकारी लैब की मांग तेज

हरियाणा की प्रसिद्ध भिवानी मंडी में सरसों की सरकारी और निजी आवक शुरू होते ही विवादों के घेरे में आ गई है। नई अनाज मंडी में सरसों की गुणवत्ता जांच (Quality Check) को लेकर किसानों और प्राइवेट लैब के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है। किसानों का सीधा आरोप है कि प्राइवेट लैब की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता का अभाव है, जिसके कारण उन्हें अपनी मेहनत की फसल का उचित दाम नहीं मिल पा रहा है।

27 Mar 2026  |  167

 

भिवानी: हरियाणा की प्रसिद्ध भिवानी मंडी में सरसों की सरकारी और निजी आवक शुरू होते ही विवादों के घेरे में आ गई है। नई अनाज मंडी में सरसों की गुणवत्ता जांच (Quality Check) को लेकर किसानों और प्राइवेट लैब के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है। किसानों का सीधा आरोप है कि प्राइवेट लैब की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता का अभाव है, जिसके कारण उन्हें अपनी मेहनत की फसल का उचित दाम नहीं मिल पा रहा है।

किसानों का आरोप: "एक ही ढेरी, अलग-अलग रिपोर्ट"

मंडी में अपनी फसल लेकर पहुंचे किसानों ने लैब की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। किसानों का कहना है कि:

असमान रिपोर्ट: एक ही खेत और एक ही ट्रैक्टर की सरसों के अलग-अलग सैंपल्स में लैब की रिपोर्ट अलग-अलग आ रही है।

आर्थिक नुकसान: गुणवत्ता कम दिखाए जाने के कारण किसानों को एमएसपी (MSP) से कम दाम पर फसल बेचने को मजबूर होना पड़ रहा है।

भरोसे का संकट: प्राइवेट लैब की कार्यप्रणाली को लेकर किसानों में अविश्वास इतना गहरा गया है कि वे अब वहां जांच कराने से कतरा रहे हैं।

सरकारी लैब को चालू करने की उठी मांग

विवाद बढ़ता देख मंडी के आढ़तियों और व्यापारियों ने भी किसानों की मांग का समर्थन किया है। उनका मानना है कि जब तक सरकारी लैब पूरी तरह सक्रिय नहीं होगी, तब तक यह गतिरोध समाप्त नहीं होगा।

"प्राइवेट लैब की रिपोर्ट पर भरोसा करना मुश्किल हो रहा है। अगर निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करनी है, तो प्रशासन को तुरंत सरकारी लैब के माध्यम से सैंपलिंग शुरू करानी चाहिए।"स्थानीय किसान

मंडी का माहौल और मौजूदा स्थिति

फिलहाल मंडी में भ्रम और नाराजगी की स्थिति बनी हुई है। किसानों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं लाई गई, तो वे विरोध प्रदर्शन को और तेज करेंगे। आढ़तियों का कहना है कि सरकारी हस्तक्षेप से ही इस अविश्वास की स्थिति को खत्म किया जा सकता है ताकि खरीद प्रक्रिया सुचारू रूप से चल सके।

प्रमुख बिंदु: एक नजर में

समस्याकिसानों की मांगसंभावित समाधान
प्राइवेट लैब की रिपोर्ट में भिन्नतासरकारी लैब को तत्काल चालू करनाकृषि अधिकारियों की निगरानी में सैंपलिंग
पारदर्शिता की कमीनिष्पक्ष जांच और उचित दामतीसरी पार्टी (Third Party) द्वारा रैंडम चेकिंग
आर्थिक नुकसान का डरगुणवत्ता मानकों की स्पष्ट जानकारीमंडी बोर्ड द्वारा शिकायतों का त्वरित निपटान

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