तेहरान/दुबई: अमेरिका और ईरान के बीच छिड़े भीषण युद्ध को आज चार हफ्ते (28 दिन) पूरे हो चुके हैं। मिसाइलों की गड़गड़ाहट और आसमान से बरसते बारूद के बीच दुनिया हैरान है कि तमाम अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बावजूद ईरान झुकने को तैयार क्यों नहीं है? इस प्रतिरोध की सबसे बड़ी शक्ति है ईरान का 'मिसाइल इन्वेंट्री', जिसकी नींव रखने वाले शख्स थे हसन तेहरानी मोगद्दम। आज जब ईरानी मिसाइलें हिंद महासागर में 4,000 किलोमीटर दूर स्थित अमेरिकी ठिकानों पर सटीक निशाना साध रही हैं, तो पूरी दुनिया मोगद्दम के विजन की चर्चा कर रही है।
कौन थे हसन तेहरानी मोगद्दम?
1959 में जन्मे हसन तेहरानी मोगद्दम ने मात्र 20 साल की उम्र में इस्लामिक क्रांति के बाद 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' (IRGC) का दामन थामा था। उन्हें ईरान की सैन्य शक्ति का 'आर्किटेक्ट' और 'मिसाइल मैन' माना जाता है।
इराक युद्ध की वो सीख, जिसने बदल दी रणनीति
1980 के दशक में ईरान-इराक युद्ध के दौरान सद्दाम हुसैन की लंबी दूरी की मिसाइलों ने ईरान को भारी नुकसान पहुँचाया था। उस समय ईरान के पास इसका कोई ठोस जवाब नहीं था। इसी कमी को भांपते हुए मोगद्दम ने कसम खाई कि वे ईरान को इतना आत्मनिर्भर बनाएंगे कि भविष्य में कोई दुश्मन हमला करने से पहले सौ बार सोचे।
स्वदेशी तकनीक: प्रतिबंधों को बनाया अवसर
ईरान पर दशकों से कड़े वैश्विक प्रतिबंध रहे हैं, जिससे विदेशी तकनीक मिलना नामुमकिन था। मोगद्दम ने इसे अपनी ताकत बनाया:
घरेलू निर्माण: उन्होंने स्थानीय इंजीनियरों की एक ऐसी फौज तैयार की जिसने स्क्रैच से मिसाइल सिस्टम विकसित किया।
शहाब सीरीज: उनके नेतृत्व में 'शहाब' सीरीज की मिसाइलें विकसित हुईं, जिन्होंने ईरान को लंबी दूरी तक मार करने की क्षमता दी।
नया कीर्तिमान: सार्वजनिक जानकारी के अनुसार ईरान की क्षमता 2,000 किमी मानी जाती थी, लेकिन वर्तमान युद्ध में 4,000 किमी तक सटीक प्रहार कर ईरान ने सबको चौंका दिया है।
'हमला करने से पहले रोकना' (Deterrence)
मोगद्दम की फिलॉसफी युद्ध लड़ने से ज्यादा युद्ध को रोकने की थी। उनका मानना था कि यदि दुश्मन को पता होगा कि पलटवार घातक होगा, तो वह कभी पहल नहीं करेगा। आज ईरान की यही 'डिटेरेंस पॉलिसी' उसे अमेरिका जैसी महाशक्ति के सामने सीना तानकर खड़े होने का साहस दे रही है।
एक रहस्यमयी मौत और अमर विरासत
2011 में एक सैन्य ठिकाने पर हुए भीषण विस्फोट में हसन तेहरानी मोगद्दम की मृत्यु हो गई। भले ही वे आज जीवित नहीं हैं, लेकिन उनके द्वारा तैयार किया गया ढांचा आज भी ईरान की सुरक्षा का सबसे मजबूत स्तंभ है। ईरान के नेता उन्हें आज भी 'राष्ट्रीय सुरक्षा का प्रहरी' मानते हैं।
ईरानी मिसाइल शक्ति: एक नजर में
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| मुख्य चेहरा | हसन तेहरानी मोगद्दम (ईरान के मिसाइल मैन) |
| रणनीति | स्वदेशी विकास और सटीक प्रहार (Self-Reliance) |
| प्रमुख मिसाइलें | शहाब सीरीज और लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें |
| वर्तमान प्रदर्शन | 4,000 किमी दूर हिंद महासागर के बेस पर सटीक हमला |
| रक्षा नीति | "दुश्मन को हमला करने से पहले डराना" |
निष्कर्ष: हसन तेहरानी मोगद्दम ने ईरान को सिर्फ हथियार नहीं दिए, बल्कि एक 'आत्मनिर्भर रक्षा प्रणाली' और 'आत्मविश्वास' दिया। यही कारण है कि 28 दिनों की भारी बमबारी के बाद भी तेहरान की मिसाइलें खामोश नहीं हुई हैं।