डिजिटल इंडिया की 'सुरक्षा दीवार' हुई मजबूत: जासूसी और साइबर हमलों के बीच CCTV के लिए नए कड़े नियम लागू; विदेशी डिवाइसों पर बढ़ी निगरानी

देश की संप्रभुता और नागरिकों की निजता को सुरक्षित रखने के लिए भारत सरकार ने एक बड़ा रणनीतिक फैसला लिया है। सार्वजनिक और सरकारी स्थानों पर इस्तेमाल होने वाले CCTV सिस्टम और टेलीकॉम डिवाइसों के लिए अब नए और बेहद सख्त सुरक्षा मानक (Technical Standards) अनिवार्य कर दिए गए हैं। 'टाइम्स ऑफ इंडिया' की रिपोर्ट के अनुसार, यह कदम हाल ही में उजागर हुए उन जासूसी नेटवर्कों के बाद उठाया गया है, जिनके तार पड़ोसी देशों से जुड़े होने की आशंका थी।

27 Mar 2026  |  213

 

नई दिल्ली: देश की संप्रभुता और नागरिकों की निजता को सुरक्षित रखने के लिए भारत सरकार ने एक बड़ा रणनीतिक फैसला लिया है। सार्वजनिक और सरकारी स्थानों पर इस्तेमाल होने वाले CCTV सिस्टम और टेलीकॉम डिवाइसों के लिए अब नए और बेहद सख्त सुरक्षा मानक (Technical Standards) अनिवार्य कर दिए गए हैं। 'टाइम्स ऑफ इंडिया' की रिपोर्ट के अनुसार, यह कदम हाल ही में उजागर हुए उन जासूसी नेटवर्कों के बाद उठाया गया है, जिनके तार पड़ोसी देशों से जुड़े होने की आशंका थी।

विदेशी हार्डवेयर और 'बैकडोर' एंट्री पर लगाम

सुरक्षा एजेंसियों ने चिंता जताई थी कि विदेशों (विशेषकर चीन जैसे देशों) से आयातित कई सीसीटीवी कैमरों में ऐसी तकनीकी कमियां (Vulnerabilities) हो सकती हैं, जिनका इस्तेमाल दूर बैठे हैकर्स डेटा चोरी या जासूसी के लिए कर सकते हैं।

अनिवार्य तकनीकी मानक: अब कंपनियों के लिए यह बताना अनिवार्य होगा कि उनके डिवाइस के मुख्य हार्डवेयर कंपोनेंट (जैसे चिपसेट और सेंसर) कहाँ से आए हैं।

प्रमाणीकरण प्रक्रिया: बाजार में बिकने वाले सीसीटीवी मॉडल्स की अब कड़ी जांच की जाएगी। अब तक सैकड़ों मॉडल्स को नए सुरक्षा मानकों के तहत प्रमाणित किया जा चुका है।

अनधिकृत पहुंच पर रोक: यह सुनिश्चित किया जाएगा कि डिवाइस में कोई ऐसा 'बैकडोर' न हो जिससे कोई बाहरी व्यक्ति सिस्टम को कंट्रोल कर सके।

सरकारी विभागों के लिए 'जीरो टॉलरेंस'

केंद्र सरकार ने सभी सरकारी दफ्तरों और संवेदनशील संस्थानों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं:

केवल प्रमाणित डिवाइस: भविष्य में केवल उन्हीं सीसीटीवी कैमरों की खरीद होगी जो नए नियमों के अनुरूप 'भरोसेमंद' (Trusted) श्रेणी में आते हैं।

पुराने सिस्टम का ऑडिट: मौजूदा कैमरों की सुरक्षा जांच (Security Audit) की जाएगी और जरूरत पड़ने पर उन्हें तुरंत अपडेट या रिप्लेस किया जाएगा।

सिर्फ कैमरा ही नहीं, पूरा नेटवर्क होगा सुरक्षित

डिजिटल सुरक्षा का यह घेरा केवल कैमरों तक सीमित नहीं है:

टेलीकॉम गियर: टेलीकॉम कंपनियों को अब केवल उन्हीं वेंडर्स से उपकरण खरीदने की अनुमति है जिन्हें सरकार ने 'भरोसेमंद स्रोत' (Trusted Sources) के रूप में मान्यता दी है। इससे 5G और भविष्य के नेटवर्क में घुसपैठ की संभावना कम हो जाएगी।

डेटा प्रोटेक्शन: डेटा को 'नई पीढ़ी की संपत्ति' मानते हुए सरकार ने डेटा सुरक्षा कानूनों को और भी सशक्त बनाया है ताकि नागरिकों की निजी जानकारी किसी विदेशी सर्वर तक न पहुँच सके।

नया सुरक्षा ढांचा: एक नजर में

क्षेत्रमुख्य बदलावउद्देश्य
CCTV कैमराहार्डवेयर सोर्स की जानकारी अनिवार्यजासूसी और रिमोट एक्सेस को रोकना
टेलीकॉम डिवाइसकेवल स्वीकृत कंपनियों से खरीदराष्ट्रीय संचार नेटवर्क को सुरक्षित करना
सरकारी संस्थानअनिवार्य सुरक्षा ऑडिट और अपडेटसंवेदनशील डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करना
डेटा कानूनसख्त दंड और भंडारण नियमनिजी जानकारी का दुरुपयोग रोकना

निष्कर्ष: दुनिया भर में निगरानी प्रणालियों (Surveillance Systems) के दुरुपयोग के उदाहरणों को देखते हुए भारत का यह कदम बेहद समयोचित है। अपने डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को 'क्लीन' और 'ट्रस्टेड' बनाकर भारत भविष्य के साइबर युद्ध (Cyber Warfare) के लिए खुद को तैयार कर रहा है।

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