पेरिस/वाशिंगटन: मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने एक बड़ा बयान देते हुए कहा है कि ईरान के खिलाफ जारी सैन्य अभियान अपने अंतिम चरण की ओर है। रूबियो के अनुसार, वाशिंगटन को पूरी उम्मीद है कि यह अभियान महीनों तक खिंचने के बजाय अगले कुछ हफ्तों में ही सफलतापूर्वक समाप्त हो जाएगा।
बिना जमीनी सेना के लक्ष्य प्राप्ति का भरोसा
फ्रांस में G7 देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए मार्को रूबियो ने स्पष्ट किया कि अमेरिका जमीन पर अपनी सेना (Ground Troops) तैनात किए बिना ही अपने सैन्य लक्ष्यों को हासिल करने की रणनीति पर काम कर रहा है। उन्होंने कहा:
"हम इस अभियान में निर्धारित समय-सीमा के अनुसार या उससे भी आगे चल रहे हैं। यह महीनों का काम नहीं, बल्कि हफ्तों की बात है। हमें विश्वास है कि हम सही समय पर इसे संपन्न कर लेंगे।"
सैनिकों की तैनाती: रणनीति या मजबूरी?
क्षेत्र में अतिरिक्त सैनिकों की आवाजाही पर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए रूबियो ने कहा कि कुछ सैनिकों को मध्य-पूर्व भेजा जरूर जा रहा है, लेकिन इसका उद्देश्य युद्ध को बढ़ाना नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कदम राष्ट्रपति को किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए अधिकतम विकल्प और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।
संघर्ष की पृष्ठभूमि और नुकसान का ब्योरा
यह सैन्य टकराव 28 फरवरी को उस समय शुरू हुआ था जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हवाई हमले किए थे। तब से अब तक स्थिति गंभीर बनी हुई है:
सऊदी अरब पर हमला: रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब स्थित प्रिंस सुल्तान एयरबेस पर ईरान द्वारा किए गए मिसाइल और ड्रोन हमलों में 12 अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं।
गंभीर स्थिति: घायल सैनिकों में से दो की हालत नाजुक बताई जा रही है। इसके साथ ही अमेरिकी सैन्य उपकरणों को भी भारी नुकसान पहुँचा है।
वैश्विक संकट: इस निरंतर जारी संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति (Energy Supply) को बुरी तरह प्रभावित किया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अस्थिरता पैदा हो गई है।
वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए, रूबियो का यह बयान अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए एक संकेत है कि अमेरिका इस मोर्चे को जल्द से जल्द समेटने की योजना बना रहा है, ताकि क्षेत्र में और अधिक मानवीय या आर्थिक क्षति को रोका जा सके।