मध्य-पूर्व में भीषण हुआ युद्ध: अब यमन के हूतियों की एंट्री, इजरायली परमाणु केंद्र के पास दागीं मिसाइलें

हूती विद्रोहियों ने इस जंग में सीधे कूदते हुए दक्षिणी इजरायल पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला बोल दिया। इस हमले के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुँच गया है।

28 Mar 2026  |  73

 

यरूशलेम/सना: अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष अब एक खतरनाक मोड़ ले चुका है। शनिवार तड़के यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने इस जंग में सीधे कूदते हुए दक्षिणी इजरायल पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला बोल दिया। इस हमले के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुँच गया है।

परमाणु अनुसंधान केंद्र के पास गूंजे सायरन

'टाइम्स ऑफ इजरायल' की रिपोर्ट के अनुसार, शुक्रवार रात से शनिवार सुबह तक दक्षिणी इजरायल के बीरशेबा और आस-पास के कस्बों में लगातार सायरन बजते रहे। सबसे चिंताजनक बात यह रही कि यमन से दागी गई मिसाइलों के कारण इजरायल के मुख्य परमाणु अनुसंधान केंद्र (Nuclear Research Center) के पास के इलाकों में भी तीसरी बार खतरे की चेतावनी जारी की गई।

इजरायली सेना (IDF) ने पुष्टि की है कि:

यमन से दागी गई मिसाइल की पहचान कर ली गई है।

हवाई रक्षा प्रणाली (Air Defense System) इस खतरे को रोकने के लिए सक्रिय है।

यह मौजूदा युद्ध में हूतियों द्वारा इजरायल पर किया गया पहला सीधा हमला है।

पूरी रात बरसते रहे गोले: ईरान और हिज्बुल्लाह का साथ

इजरायल के लिए यह रात भारी रही। केवल यमन ही नहीं, बल्कि ईरान और हिज्बुल्लाह ने भी पूरी रात इजरायल पर हमलों का सिलसिला जारी रखा। सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह एक समन्वित (coordinated) हमला था ताकि इजरायल की सुरक्षा प्रणाली को उलझाया जा सके।

हूतियों की खुली चेतावनी: "लाल सागर का उपयोग पड़ा भारी"

हमले से ठीक पहले हूती विद्रोहियों ने एक कड़ा बयान जारी किया था। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि:

"यदि कोई भी देश ईरान के खिलाफ युद्ध में अमेरिका या इजरायल की मदद करता है, या लाल सागर (Red Sea) के जलमार्ग का उपयोग ईरान पर हमला करने के लिए किया जाता है, तो हूती सेना सैन्य हस्तक्षेप करने से पीछे नहीं हटेगी।"

युद्ध का नया मोर्चा और वैश्विक चिंता

28 फरवरी से शुरू हुआ यह संघर्ष अब क्षेत्रीय युद्ध (Regional War) का रूप ले चुका है। एक तरफ अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो इसे हफ्तों में खत्म करने की उम्मीद जता रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ यमन की एंट्री ने समीकरण बदल दिए हैं।

मुख्य बिंदु:

रणनीतिक बढ़त: हूतियों के हमले ने साबित कर दिया है कि ईरान के सहयोगी देश लंबी दूरी तक प्रहार करने में सक्षम हैं।

ऊर्जा संकट: लाल सागर में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक तेल और गैस की आपूर्ति पर और गहरा संकट मंडराने लगा है।

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