'मस्क बातचीत में शामिल नहीं थे': विदेश मंत्रालय ने पीएम मोदी और ट्रंप की फोन कॉल पर अमेरिकी मीडिया के दावों को नकारा

पश्चिम एशिया (ईरान-इजरायल) के तनाव के बीच प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हालिया बातचीत को लेकर विदेश मंत्रालय ने स्थिति स्पष्ट की है। भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने उन मीडिया रिपोर्ट्स को पूरी तरह सिरे से खारिज कर दिया है, जिनमें दावा किया गया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच ईरान युद्ध को लेकर हुई फोन कॉल में दिग्गज कारोबारी एलन मस्क भी मौजूद थे। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि यह बातचीत पूरी तरह से दो राष्ट्रप्रमुखों के बीच की कूटनीतिक चर्चा थी।

28 Mar 2026  |  68

 

नई दिल्ली: भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने उन मीडिया रिपोर्ट्स को पूरी तरह सिरे से खारिज कर दिया है, जिनमें दावा किया गया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच ईरान युद्ध को लेकर हुई फोन कॉल में दिग्गज कारोबारी एलन मस्क भी मौजूद थे। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि यह बातचीत पूरी तरह से दो राष्ट्रप्रमुखों के बीच की कूटनीतिक चर्चा थी।

विदेश मंत्रालय का आधिकारिक स्पष्टीकरण

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान कहा:

"हमने उन खबरों को देखा है जिनमें एक तीसरे व्यक्ति की मौजूदगी का दावा किया गया है। हम स्पष्ट करना चाहते हैं कि 24 मार्च 2026 को हुई टेलीफोनिक चर्चा केवल प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच हुई थी। इस बातचीत का मुख्य उद्देश्य पश्चिम एशिया की गंभीर स्थिति पर विचारों का आदान-प्रदान करना था।"

क्या था विवाद का कारण?

विवाद की शुरुआत अमेरिकी समाचार पत्र 'न्यूयॉर्क टाइम्स' की एक रिपोर्ट से हुई थी। रिपोर्ट में दो अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से दावा किया गया था कि:

एलन मस्क इस हाई-प्रोफाइल कॉल के दौरान मौजूद थे।

हालांकि, रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं था कि मस्क ने बातचीत में कोई हस्तक्षेप किया या नहीं।

उल्लेखनीय है कि पिछले साल ट्रंप सरकार में 'कर्मचारियों की कटौती' के कार्यभार से हटने के बाद ट्रंप और मस्क के बीच अनबन की खबरें भी सामने आई थीं।

बातचीत के मुख्य केंद्र: ईरान युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य

प्रधानमंत्री मोदी ने खुद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर इस बातचीत के प्रमुख बिंदुओं को साझा किया। कूटनीतिक दृष्टि से इस कॉल के तीन सबसे महत्वपूर्ण पहलू रहे:

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz): दोनों नेताओं ने इस जलमार्ग को "खुला, सुरक्षित और सुलभ" रखने की आवश्यकता पर जोर दिया, क्योंकि यह वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए जीवनरेखा है।

तनाव कम करने की अपील: भारत ने इस क्षेत्र में शांति बनाए रखने और युद्ध को रोकने के अपने पारंपरिक रुख को दोहराया।

क्षेत्रीय स्थिरता: दोनों देशों ने पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य संघर्ष पर चिंता व्यक्त की और कूटनीतिक समाधान की वकालत की।

तथ्यों की जाँच: एक नज़र में

विषयमीडिया का दावाभारत सरकार का रुख
तीसरे पक्ष की मौजूदगीएलन मस्क कॉल में शामिल थे।खारिज किया; केवल मोदी और ट्रंप के बीच बात हुई।
बातचीत की तारीख24 मार्च 2026आधिकारिक तौर पर पुष्टि की गई।
प्रमुख मुद्दानिजी निवेशक्षेत्रीय सुरक्षा; ईरान युद्ध और वैश्विक व्यापार मार्ग।
मस्क-ट्रंप संबंधकरीबी सहयोगीसरकार छोड़ने के बाद अनबन की खबरें।

निष्कर्ष: विदेश मंत्रालय के इस त्वरित स्पष्टीकरण ने उन अटकलों पर विराम लगा दिया है जो इस कूटनीतिक बातचीत को 'व्यावसायिक' रंग देने की कोशिश कर रही थीं। भारत ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि अंतरराष्ट्रीय संघर्षों के समाधान के लिए वह गंभीर कूटनीति का पक्षधर है।

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