नई दिल्ली। भारतीय वायुसेना (IAF) अपनी हवाई शक्ति को धार देने के लिए एक बड़े अपग्रेड की ओर कदम बढ़ा चुकी है। रक्षा मंत्रालय ने 25 मार्च को सोवियत मूल के MiG-29 UPG लड़ाकू विमानों के बेड़े को अत्याधुनिक ASRAAM (एडवांस्ड शॉर्ट रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल) से लैस करने के प्रस्ताव को आधिकारिक मंजूरी दे दी है। इस कदम से भारत की हवाई सुरक्षा और 'डॉगफाइट' (आसमान में आमने-सामने की जंग) क्षमता में अभूतपूर्व वृद्धि होगी।
R-73 की जगह लेगी यूरोपीय तकनीक
वायुसेना वर्तमान में अपने 55 से अधिक MiG-29 विमानों में पुराने सोवियत जमाने की R-73 मिसाइलों का उपयोग कर रही है, जिनकी मारक क्षमता केवल 10–15 किमी तक सीमित है। इसकी तुलना में यूरोपीय कंपनी MBDA द्वारा निर्मित ASRAAM की रेंज 25 किलोमीटर से भी अधिक है, जो दुश्मन के विमानों को दोगुनी दूरी से ही निशाना बनाने में सक्षम है।
ASRAAM की मारक क्षमता और विशेषताएं
ASRAAM एक चौथी पीढ़ी की मिसाइल है जो अपनी गति और सटीकता के लिए जानी जाती है। इसके बेड़े में शामिल होने से निम्नलिखित तकनीकी लाभ मिलेंगे:
रफ्तार: यह आवाज़ की गति से तीन गुना तेज़ यानी Mach 3 से अधिक की रफ़्तार से हमला करती है।
तकनीक: यह 'फायर एंड फॉरगेट' (दागो और भूल जाओ) तकनीक और 'हीट-सीकिंग' गाइडेंस सिस्टम से लैस है।
मारक क्षमता: 2.9 मीटर लंबी और 88 किलोग्राम वजन वाली यह मिसाइल हाई-एक्सप्लोसिव वॉरहेड ले जाने में सक्षम है।
सटीकता: इसका उन्नत रॉकेट मोटर इसे अपने प्रतिस्पर्धियों की तुलना में अधिक रेंज और बेहतर प्रदर्शन प्रदान करता है।
चीन और पाकिस्तान की चुनौतियों का करारा जवाब
क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज से यह अपग्रेड अत्यंत महत्वपूर्ण है। चीन ने 2015 में ही अपने J-10C और J-20 जैसे विमानों में PL-10 मिसाइलें तैनात की हैं, जबकि पाकिस्तान अपने JF-17 Block III विमानों में इसका एक्सपोर्ट वर्जन इस्तेमाल कर रहा है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ASRAAM का बड़ा रॉकेट मोटर इसे चीनी मिसाइलों की तुलना में बेहतर रेंज और 'नो-एस्केप ज़ोन' (जहाँ से दुश्मन का विमान बच न सके) प्रदान करता है।
संपूर्ण पैकेज और ट्रेनिंग
इस रक्षा सौदे में केवल मिसाइलें ही शामिल नहीं हैं, बल्कि विमानों में इनका एकीकरण (Integration), परीक्षण, नए लॉन्चर, सपोर्ट सिस्टम और ग्राउंड स्टाफ व पायलटों की ट्रेनिंग भी शामिल है। गौरतबल है कि ASRAAM को पहले ही स्वदेशी LCA Tejas और Jaguar विमानों पर सफलतापूर्वक तैनात किया जा चुका है।