याउंडे (कैमरून)/नई दिल्ली। कैमरून की राजधानी याउंडे में आयोजित विश्व व्यापार संगठन (WTO) के 14वें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन में भारत के कृषि क्षेत्र ने एक बड़ा मोर्चा खोल दिया है। 136 किसान संगठनों के प्रतिनिधि निकाय, राष्ट्रीय किसान महासंघ (RKM) ने सभी WTO सदस्य देशों को एक औपचारिक पत्र लिखकर बौद्धिक संपदा (IP) नियमों से जुड़ी 'नॉन-वॉयलेशन कंप्लेंट' (NVC) रोक (Moratorium) को स्थायी रूप से बढ़ाने की पुरजोर मांग की है।
क्या है किसानों की मुख्य चिंता?
किसानों का तर्क है कि यदि TRIPS (बौद्धिक संपदा अधिकारों के व्यापार से संबंधित पहलू) के तहत NVC रोक को समाप्त होने दिया गया, तो बहुराष्ट्रीय कंपनियां भारत जैसे विकासशील देशों की उन नीतियों को चुनौती दे सकेंगी जो किसानों को सस्ती खाद, कीटनाशक और पशु चिकित्सा दवाएं उपलब्ध कराती हैं।
RKM के पत्र के प्रमुख बिंदु:
किफायती इनपुट: रोक हटने से कीटनाशकों और कृषि रसायनों की कीमतें आसमान छू सकती हैं, जो छोटे किसानों की आजीविका के लिए घातक होगा।
जेनेरिक उत्पादन का संरक्षण: यह रोक 'हिंदुस्तान इंसेक्टिसाइड्स लिमिटेड' (HIL) जैसी सरकारी और घरेलू जेनेरिक कंपनियों को बचाने के लिए आवश्यक है।
खाद्य सुरक्षा: महासंघ ने चेतावनी दी है कि यह केवल व्यापारिक तकनीकी का मामला नहीं है, बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा और किसानों के जीवन-मरण का प्रश्न है।
डिप्लोमेसी का पेच: ई-कॉमर्स बनाम बौद्धिक संपदा
WTO में परंपरागत रूप से 'ई-कॉमर्स ड्यूटी' पर रोक और 'TRIPS NVC' पर रोक को एक पैकेज डील के रूप में हर दो साल में बढ़ाया जाता है।
अमेरिका का पक्ष: अमेरिका ई-कॉमर्स पर सीमा शुल्क न लगाने की छूट को स्थायी बनाना चाहता है।
भारत का कड़ा रुख: भारत ई-कॉमर्स पर छूट को स्थायी बनाने का विरोध कर रहा है, क्योंकि इससे राजस्व की हानि होती है। अब किसानों के इस नए दबाव ने भारत के पक्ष को और मजबूती दे दी है।
TRIPS नॉन-वॉयलेशन कंप्लेंट (NVC) क्या है?
सामान्यतः किसी देश को तभी विवाद निपटान निकाय में घसीटा जाता है जब वह नियमों का उल्लंघन करे। लेकिन 'नॉन-वॉयलेशन' प्रावधान के तहत, एक देश दूसरे देश की ऐसी नीतियों (जैसे सस्ती दवा नीति) को भी चुनौती दे सकता है जो तकनीकी रूप से नियमों के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन दूसरे देश के संभावित लाभ को कम करती हैं। वर्तमान में इस पर रोक (Moratorium) लगी हुई है, जिसे किसान स्थायी बनाना चाहते हैं।
राष्ट्रीय किसान महासंघ का बयान: "भारत में इनपुट लागत बढ़ने और फसलों के दाम स्थिर रहने के कारण हर साल औसतन 10,000 किसान आत्महत्या करते हैं। ऐसे में सस्ती कृषि दवाओं तक पहुंच सुनिश्चित करना एक अनिवार्य आवश्यकता है।"
निष्कर्ष
याउंडे सम्मेलन में भारत की ओर से यह स्पष्ट संदेश दिया गया है कि डिजिटल व्यापार और बौद्धिक संपदा के बीच हो रही 'क्विड-प्रो-क्वो' (लेन-देन) की कूटनीति में किसानों के हितों के साथ समझौता नहीं किया जाएगा।