अर्श से फर्श तक का सफर: 12,000 करोड़ के मालिक विजयपत सिंघानिया का संघर्षपूर्ण अंत, रिश्तों की कड़वाहट बनी 'सबक'

रेमंड ग्रुप को 'The Complete Man' की पहचान देने वाले दिग्गज उद्योगपति विजयपत सिंघानिया का 87 वर्ष की आयु में निधन हो गया। लेकिन उनकी विदाई के साथ ही भारतीय कॉर्पोरेट जगत के उस सबसे दर्दनाक अध्याय की भी चर्चा तेज हो गई है, जिसने सिखाया कि अपार दौलत भी हमेशा सुख की गारंटी नहीं होती।

29 Mar 2026  |  69

 

मुंबई | विशेष रिपोर्ट: रेमंड ग्रुप को 'The Complete Man' की पहचान देने वाले दिग्गज उद्योगपति विजयपत सिंघानिया का 87 वर्ष की आयु में निधन हो गया। लेकिन उनकी विदाई के साथ ही भारतीय कॉर्पोरेट जगत के उस सबसे दर्दनाक अध्याय की भी चर्चा तेज हो गई है, जिसने सिखाया कि अपार दौलत भी हमेशा सुख की गारंटी नहीं होती।

एक फैसले ने बदली तकदीर

कभी 12,000 करोड़ रुपये के साम्राज्य के अधिपति रहे विजयपत सिंघानिया के जीवन में साल 2015 एक ऐसा मोड़ लेकर आया, जिसने उनकी पूरी दुनिया बदल दी। भावुकता और भरोसे में आकर उन्होंने रेमंड ग्रुप के अपने सारे शेयर बेटे गौतम सिंघानिया के नाम कर दिए। इसके बाद शुरू हुआ पारिवारिक विवादों का वह अंतहीन सिलसिला, जिसने उन्हें अपनी ही बनाई आलीशान इमारतों से बेदखल कर दिया।

किराये के घर में बीता अंतिम समय

मुंबई की पहचान मानी जाने वाली गगनचुंबी इमारत 'जेके हाउस' के मालिक रहे विजयपत को जीवन के अंतिम वर्षों में दक्षिण मुंबई के एक किराये के घर में रहना पड़ा। उन्होंने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया था कि:

सुविधाओं का अभाव: उनसे कार, ड्राइवर और यहाँ तक कि 'चेयरमैन एमेरिटस' का सम्मानजनक दर्जा भी छीन लिया गया था।

आर्थिक चुनौती: एक समय अरबों के मालिक रहे शख्स के लिए रोजमर्रा के खर्च चलाना भी एक संघर्ष बन गया था।

रिश्तों में दरार: फ्लैट और संपत्ति को लेकर विवाद कोर्ट की दहलीज तक जा पहुँचा, जिससे पिता-पुत्र के रिश्तों में कभी न भरने वाली खाई पैदा हो गई।

'जीवन की सबसे बड़ी भूल'

विजयपत सिंघानिया ने अपने कई साक्षात्कारों में इस बात का अफसोस जताया था कि अपनी पूरी संपत्ति बेटे को सौंपना उनकी "सबसे बड़ी भूल" थी। उन्होंने अभिभावकों को नसीहत दी थी कि "सब कुछ बच्चों को न सौंपें, बल्कि अपने पास भी कुछ बचाकर रखें।"

विरासत जो अमर रहेगी

भले ही उनके अंतिम वर्ष संघर्षपूर्ण रहे हों, लेकिन व्यावसायिक जगत में उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता:

ब्रांड मेकर: उन्होंने 'पार्क एवेन्यू' जैसे प्रतिष्ठित ब्रांड लॉन्च किए।

ग्लोबल विजन: 1980 के दशक में रेमंड की कमान संभालकर उसे अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई।

साहसी व्यक्तित्व: वे केवल एक बिजनेसमैन नहीं, बल्कि विश्व रिकॉर्ड बनाने वाले उत्साही पायलट भी थे।

निष्कर्ष

विजयपत सिंघानिया का निधन न केवल एक महान उद्योगपति का अंत है, बल्कि यह कहानी आधुनिक समाज में रिश्तों, भरोसे और उत्तराधिकार के फैसलों पर एक गहरी सीख छोड़ जाती है।

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