बेंगलुरु | विशेष खेल डेस्क: महान क्रिकेटर सुनील गावस्कर ने आईपीएल 2026 के उद्घाटन के अवसर पर अपने कॉलम के जरिए खेल और संवेदनाओं के अनूठे संगम को रेखांकित किया है। जहाँ एक ओर 2008 की यादें ताज़ा हो रही हैं, वहीं दूसरी ओर बेंगलुरु में हाल ही में हुई एक दुखद घटना ने इस बार के जश्न का स्वरूप बदल दिया है।
संवेदनाओं का सम्मान: रद्द हुआ उद्घाटन समारोह
गावस्कर ने बीसीसीआई (BCCI) के उस फैसले की जमकर सराहना की है, जिसमें बेंगलुरु में हुई भगदड़ के पीड़ितों के सम्मान में भव्य उद्घाटन समारोह को रद्द कर दिया गया। यह हादसा उन युवा प्रशंसकों के साथ हुआ था जो अपने पसंदीदा खिलाड़ियों को देखने के लिए उत्साहित थे।
11 सीटें रहेंगी खाली: कर्नाटक राज्य क्रिकेट संघ (KSCA) ने इस त्रासदी में जान गंवाने वालों की याद में स्टेडियम में 11 सीटें खाली रखने का निर्णय लिया है।
गावस्कर ने वेंकटेश प्रसाद (अध्यक्ष, KSCA) और उनकी टीम की प्रशंसा की, जिन्होंने चुनौतियों के बावजूद मैचों की मेजबानी सुनिश्चित की।
फ्लैशबैक: 2008 का वह ऐतिहासिक धमाका
लेख में गावस्कर ने 2008 के उस पहले मैच को याद किया, जब ब्रेंडन मैकुलम ने इसी मैदान पर 158 रनों की आतिशी पारी खेलकर आईपीएल के भविष्य की नींव रखी थी। उन्होंने लिखा कि चिन्नास्वामी स्टेडियम की तैयारियां आज भी वैसी ही ऊर्जा का अहसास करा रही हैं, जैसी 19 साल पहले थी।
टिकटों का रोचक किस्सा: तब और अब
गावस्कर ने अपने कॉलम में एक दिलचस्प तुलना भी की है। कर्नाटक के विधायकों द्वारा मानार्थ (Complimentary) टिकटों की मांग पर उन्होंने अपने दौर के कुछ किस्से साझा किए:
75 टिकटों का दौर: पहले टीम के 15 सदस्यों (14 खिलाड़ी + 1 मैनेजर) के बीच 75 टिकट बांटे जाते थे, यानी हर खिलाड़ी को 5 टिकट मिलते थे।
100 टिकटों की जंग: गावस्कर ने बतौर कप्तान बोर्ड को 100 टिकटों के लिए मनाया था, ताकि स्थानीय खिलाड़ियों को अधिक पास मिल सकें।
दिलीप दोषी का फायदा: कोलकाता टेस्ट के दौरान दिलीप दोषी इकलौते स्थानीय खिलाड़ी थे, जिससे उन्हें सबसे ज्यादा अतिरिक्त टिकट मिले थे।
"आजकल टीमें बहुत बड़ी हो गई हैं। अगर टिकटों की संख्या पहले जितनी ही है, तो खिलाड़ियों को शायद अब सिर्फ 2 या 3 टिकट ही मिल पाते होंगे।" — सुनील गावस्कर
निष्कर्ष
सुनील गावस्कर का यह लेख याद दिलाता है कि क्रिकेट केवल चौकों-छक्कों का खेल नहीं है, बल्कि यह उन प्रशंसकों की भावनाओं से भी जुड़ा है जो इसे 'धर्म' मानते हैं। उद्घाटन समारोह का रद्द होना उन परिवारों के प्रति एकजुटता दिखाने का एक साहसी कदम है।