भारतीय शेयर बाजार में 'मार्च प्रलय': विदेशी निवेशकों ने निकाले रिकॉर्ड 1.14 लाख करोड़ रुपये, आखिर क्यों भाग रहा है विदेशी पैसा?

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने इस महीने घरेलू बाजार से 1.14 लाख करोड़ रुपये (लगभग 12.3 अरब डॉलर) की भारी-भरकम राशि निकाल ली है ,एनएसडीएल (NSDL) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं:

29 Mar 2026  |  57

 

मुंबई | बिज़नेस डेस्क: भारतीय शेयर बाजार के लिए मार्च 2026 का महीना ऐतिहासिक रूप से उथल-पुथल भरा साबित हुआ है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने इस महीने घरेलू बाजार से 1.14 लाख करोड़ रुपये (लगभग 12.3 अरब डॉलर) की भारी-भरकम राशि निकाल ली है। यह भारतीय पूंजी बाजार के इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी मासिक निकासी है।

निकासी के डराने वाले आंकड़े

एनएसडीएल (NSDL) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं:

मार्च 2026: ₹1,13,380 करोड़ की शुद्ध बिकवाली (27 मार्च तक)।

पिछला रिकॉर्ड: अक्टूबर 2024 में ₹94,017 करोड़ की निकासी हुई थी।

साल 2026 का कुल योग: अब तक विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से 1.27 लाख करोड़ रुपये बाहर निकाल चुके हैं।

बिकवाली के 5 मुख्य कारण: विशेषज्ञों की राय

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, यह गिरावट केवल घरेलू नहीं बल्कि वैश्विक कारणों का परिणाम है:

1. पश्चिम एशिया संकट और कच्चे तेल की आंच: जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स के वीके विजयकुमार के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी युद्ध ने वैश्विक अनिश्चितता बढ़ा दी है। इससे कच्चे तेल की कीमतें उछल गई हैं, जिसका सीधा असर भारत के व्यापार घाटे और कंपनियों के मुनाफे पर पड़ रहा है।

2. डॉलर के मुकाबले कमजोर होता रुपया: रुपये की लगातार गिरती कीमत ने विदेशी निवेशकों के वास्तविक रिटर्न को कम कर दिया है। जब रुपया कमजोर होता है, तो विदेशी निवेशक अपना मुनाफा बचाने के लिए डॉलर में पैसा वापस ले जाना बेहतर समझते हैं।

3. अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का आकर्षण: मॉर्निंगस्टार इंडिया के हिमांशु श्रीवास्तव ने बताया कि अमेरिका में बॉन्ड प्रतिफल (Bond Yield) ऊंचा बना हुआ है। जब विकसित बाजारों में बिना जोखिम के अच्छा रिटर्न मिलता है, तो निवेशक भारत जैसे उभरते बाजारों (Emerging Markets) से पैसा निकालकर सुरक्षित बाजारों की ओर रुख करते हैं।

4. वैश्विक तरलता (Liquidity) में कमी: दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरें ऊंची रखने और तरलता कम करने से निवेश योग्य अधिशेष धन (Surplus Cash) कम हो गया है।

5. प्रवासियों द्वारा भेजे जाने वाले धन (Remittances) पर चिंता: खाड़ी देशों में तनाव के कारण वहां रहने वाले भारतीयों द्वारा भेजे जाने वाले धन में कमी आने की आशंका है, जिससे भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ सकता है।

बाजार की वर्तमान स्थिति

दिलचस्प बात यह है कि इसी साल फरवरी में एफपीआई ने 17 महीने के उच्च स्तर (₹22,615 करोड़) का निवेश किया था, लेकिन मार्च के घटनाक्रमों ने पूरी तस्वीर बदल दी है। अभी इस महीने का एक कारोबारी सत्र शेष है, जिससे यह आंकड़ा और भी बढ़ सकता है।

आगे की राह

विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक भू-राजनीतिक तनाव कम नहीं होता और कच्चे तेल की कीमतें स्थिर नहीं होतीं, तब तक एफपीआई की वापसी चुनौतीपूर्ण रहेगी। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशक (DII) बाजार को संभालने की कोशिश कर रहे हैं।

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