परमाणु महायुद्ध की आहट? ईरान ने संसद में पेश किया NPT से हटने का बिल; दुनिया भर में छिड़ी नई बहस

ईरान की संसद में परमाणु अप्रसार संधि (NPT) से बाहर निकलने का विधेयक पेश किया गया है। यह कदम न केवल ईरान की परमाणु नीति में बड़े बदलाव का संकेत है, बल्कि मध्य पूर्व में 'न्यूक्लियर रेस' को और तेज कर सकता है।

29 Mar 2026  |  72

 

तेहरान/वॉशिंगटन: अमेरिका और इजरायल के साथ सीधे सैन्य संघर्ष के बीच ईरान ने एक ऐसा दांव चला है जिसने वैश्विक परमाणु व्यवस्था की नींव हिला दी है। ईरान की संसद में परमाणु अप्रसार संधि (NPT) से बाहर निकलने का विधेयक पेश किया गया है। यह कदम न केवल ईरान की परमाणु नीति में बड़े बदलाव का संकेत है, बल्कि मध्य पूर्व में 'न्यूक्लियर रेस' को और तेज कर सकता है।

ईरान के इस कदम का क्या है अर्थ?

ईरानी सांसद मालेक शरियाती द्वारा पेश किए गए इस प्रस्ताव के तीन मुख्य बिंदु हैं:

NPT से पूर्ण निकासी: अंतरराष्ट्रीय परमाणु निरीक्षणों और पाबंदियों को सिरे से खारिज करना।

पुराने कानूनों की समाप्ति: परमाणु समझौते (JCPOA) के तहत ईरान की प्रतिबद्धताओं को नियंत्रित करने वाले सभी मौजूदा कानूनों को रद्द करना।

नया गठबंधन: सहयोगी देशों के साथ मिलकर एक स्वतंत्र और नया अंतरराष्ट्रीय परमाणु ढांचा तैयार करना।

क्या है NPT और क्यों हो रही है इसकी चर्चा?

1970 में लागू हुई Non-Proliferation Treaty (NPT) का मुख्य उद्देश्य दुनिया को परमाणु हथियारों की होड़ से बचाना है।

नियम: यह संधि केवल 5 देशों (अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन और फ्रांस) को परमाणु शक्ति संपन्न मानती है और बाकी देशों पर हथियार बनाने की पाबंदी लगाती है।

निकासी का रास्ता: संधि के अनुच्छेद 10 के अनुसार, यदि कोई देश मानता है कि उसके 'सर्वोच्च हित' खतरे में हैं, तो वह 3 महीने का नोटिस देकर इससे हट सकता है। ईरान इसी प्रावधान का इस्तेमाल करने की तैयारी में है।

भारत का स्टैंड: क्यों हम इस संधि से दूर रहे?

भारत दुनिया के उन गिने-चुने देशों में शामिल है जिन्होंने NPT पर कभी हस्ताक्षर नहीं किए। भारत का तर्क है कि:

भेदभावपूर्ण नीति: यह संधि दुनिया को 'हैव' (जिनके पास हथियार हैं) और 'हैव नॉट' (जिनके पास नहीं हैं) में बांटती है।

न्यूक्लियर ट्रायड: भारत ने अपनी सुरक्षा के लिए न्यूक्लियर ट्रायड (जमीन, हवा और पानी तीनों जगह से परमाणु हमला करने की क्षमता) हासिल की है। 'पहले हमला न करने' (No First Use) की नीति के साथ भारत एक जिम्मेदार परमाणु शक्ति बना हुआ है।

न्यूक्लियर ट्रायड: सैन्य ताकत का त्रिकोण

ईरान के इस कदम के बाद 'न्यूक्लियर ट्रायड' शब्द फिर चर्चा में है। यह किसी देश की वह क्षमता है जिसमें वह:

जमीन (इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल)

हवा (रणनीतिक बमवर्षक विमान)

पानी (पनडुब्बी आधारित मिसाइलें) ...इन तीनों माध्यमों से परमाणु जवाबी कार्रवाई कर सके।

चुनौतियां और भविष्य

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईरान NPT से हटता है, तो अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) का उस पर कोई नियंत्रण नहीं रहेगा। इससे इजरायल और अमेरिका के साथ चल रहा युद्ध एक विनाशकारी मोड़ ले सकता है।

NPT बनाम TPNW: जहाँ NPT परमाणु हथियारों के 'प्रसार' को रोकती है, वहीं 2021 में लागू हुई TPNW (परमाणु हथियारों के निषेध पर संधि) परमाणु हथियारों को पूरी तरह अवैध घोषित करने की वकालत करती है। हालांकि, कोई भी परमाणु संपन्न देश फिलहाल हथियारों को नष्ट करने के मूड में नहीं दिख रहा है।

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