पटना। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सोमवार को राज्य विधान परिषद की सदस्यता से त्यागपत्र देंगे। लंबे समय तक बिहार विधानमंडल के उच्च सदन का हिस्सा रहने के बाद, अब वे देश की संसद के ऊपरी सदन यानी राज्यसभा में अपनी भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं।
संवैधानिक प्रक्रिया और इस्तीफा
मिली जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार व्यक्तिगत रूप से विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह से मुलाकात कर अपना इस्तीफा सौंपेंगे। संवैधानिक नियमों के मुताबिक, किसी भी विधान पार्षद (MLC) को अपना इस्तीफा स्वयं सभापति को देना अनिवार्य होता है।
नीतीश कुमार का विधान परिषद में यह चौथा कार्यकाल था, जो तकनीकी रूप से वर्ष 2030 तक चलना था। हालांकि, इसी महीने की 16 तारीख को राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने के बाद अब उनके लिए राज्य की सदस्यता छोड़ना आवश्यक हो गया है।
वरिष्ठ नेताओं के साथ गहन मंथन
इस्तीफे से ठीक पहले रविवार को मुख्यमंत्री आवास पर राजनीतिक सरगर्मियां तेज रहीं। नीतीश कुमार ने जनता दल यूनाइटेड (JDU) के दिग्गज नेताओं के साथ लंबी बैठक की। इस बैठक में:
पार्टी के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा
केंद्रीय मंत्री ललन सिंह
मंत्री विजय कुमार चौधरी और अशोक चौधरी जैसे प्रमुख नेता शामिल रहे।
मोकामा के विधायक अनंत सिंह ने भी मुख्यमंत्री से मुलाकात की। सूत्रों के अनुसार, कई नेताओं ने भावुक होकर मुख्यमंत्री से इस्तीफा न देने का आग्रह भी किया, लेकिन नीतीश कुमार अपने निर्णय पर अडिग रहे।
अगला पड़ाव: दिल्ली की ओर प्रस्थान
संवैधानिक प्रावधानों के तहत, संसद के लिए निर्वाचित होने के 14 दिनों के भीतर राज्य विधानमंडल की सदस्यता छोड़नी होती है। इसी क्रम में यह कदम उठाया जा रहा है।
शपथ ग्रहण की संभावित तिथि: सूत्रों के मुताबिक, नीतीश कुमार 10 अप्रैल 2026 को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ले सकते हैं।