नई दिल्ली। हवाई यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए केंद्र सरकार और विमानन नियामक DGCA ने एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। अब एयरलाइंस कंपनियां मनमाने ढंग से हर सीट के चयन पर शुल्क नहीं वसूल सकेंगी। नए निर्देशों के अनुसार, 20 अप्रैल 2026 से प्रत्येक फ्लाइट की कम से कम 60 प्रतिशत सीटें यात्रियों के लिए बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के उपलब्ध करानी होंगी।
क्या हैं नए नियम? (प्रमुख बिंदु)
नागरिक उड्डयन मंत्रालय के आदेश पर डीजीसीए ने एयर ट्रांसपोर्ट सर्कुलर में संशोधन किया है, जिसके मुख्य अंश निम्नलिखित हैं:
निशुल्क सीटों का कोटा: वर्तमान में केवल 20% सीटें मुफ्त चयन के लिए उपलब्ध होती हैं, जिसे बढ़ाकर अब 60% कर दिया गया है।
पारदर्शी नीति: एयरलाइंस को अपनी वेबसाइट और बुकिंग इंटरफेस पर स्पष्ट रूप से दिखाना होगा कि कौन सी सीटें मुफ्त हैं।
PNR नियम: एक ही PNR पर यात्रा करने वाले यात्रियों को, जहाँ तक संभव हो, एक साथ (Adjacent Seats) सीटें आवंटित करनी होंगी।
अतिरिक्त सेवाएं: खेल उपकरण या संगीत वाद्ययंत्रों जैसे वैकल्पिक शुल्कों को भी वेबसाइट पर पारदर्शी तरीके से प्रदर्शित करना अनिवार्य होगा।
क्यों लिया गया यह फैसला?
पिछले कुछ समय से यात्रियों की ओर से लगातार शिकायतें आ रही थीं कि एयरलाइंस 'वेब चेक-इन' के दौरान लगभग हर सीट के लिए 200 रुपये से लेकर 2,100 रुपये तक वसूल रही हैं। फ्रंट रो और एक्स्ट्रा लेग रूम के नाम पर वसूले जाने वाले इन शुल्कों ने यात्रियों के बजट को बिगाड़ दिया था।
एयरलाइंस का विरोध और चिंताएं
इस फैसले का इंडिगो (IndiGo), एयर इंडिया और स्पाइसजेट जैसी बड़ी कंपनियों ने कड़ा विरोध किया है। फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस (FIA) ने मंत्रालय को पत्र लिखकर कहा है कि:
इस कदम से राजस्व में होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए उन्हें हवाई किराए (Airfares) में बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है।
पार्टी ने इस निर्णय को वापस लेने का आग्रह किया है, हालांकि सरकार अपने रुख पर अडिग नजर आ रही है।
इन्फोग्राफिक डेटा: एक नजर में परिवर्तन
| विवरण | वर्तमान स्थिति | 20 अप्रैल 2026 से |
|---|---|---|
| मुफ्त सीटों का प्रतिशत | 20% | 60% (न्यूनतम) |
| सीट चयन शुल्क | ₹200 - ₹2,100 | 40% प्रीमियम सीटों पर ही लागू |
| एक PNR पर सीटिंग | रैंडम आवंटन (अक्सर) | अनिवार्य रूप से पास-पास |
| दैनिक यात्री भार | ~5 लाख यात्री | - |