चंडीगढ़। ऑपरेशन ब्लू स्टार के दौरान सिख रेफरेंस लाइब्रेरी और स्वर्ण मंदिर परिसर से जब्त की गई ऐतिहासिक व धार्मिक वस्तुओं की सुरक्षा को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने इस मामले में केंद्र सरकार, पंजाब सरकार, सीबीआई (CBI) और भारतीय सेना से जवाब तलब किया है।
क्या है पूरा मामला?
याचिकाकर्ता सतिंदर सिंह द्वारा दायर जनहित याचिका में यह आरोप लगाया गया है कि जून 1984 में सैन्य कार्रवाई के दौरान सिख रेफरेंस लाइब्रेरी, तोशाखाना और सेंट्रल सिख म्यूजियम से बड़ी संख्या में अमूल्य पांडुलिपियाँ, धार्मिक ग्रंथ और कलाकृतियाँ सीज की गई थीं। याचिका के अनुसार, इनमें से कई वस्तुएं अब गायब हैं, जिनमें दशमेश पिता गुरु गोबिंद सिंह जी द्वारा हस्तलिखित पावन ग्रंथ और ऐतिहासिक हुक्मनामे भी शामिल हैं।
याचिकाकर्ता की मुख्य मांगें:
अदालत के समक्ष याचिकाकर्ता के वकील ने निम्नलिखित प्रमुख बिंदु रखे:
विस्तृत सूची: सरकार और संबंधित एजेंसियां उन सभी वस्तुओं की सूची सार्वजनिक करें जिन्हें ऑपरेशन के दौरान जब्त किया गया था।
पारदर्शिता: जो वस्तुएं शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) को वापस की जा चुकी हैं, उन्हें शोध और दर्शन के लिए सार्वजनिक किया जाए।
जवाबदेही: जो वस्तुएं अब तक वापस नहीं मिली हैं, उनकी वर्तमान स्थिति स्पष्ट की जाए।
SGPC की भूमिका पर सवाल
याचिका में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि:
"अति दुर्लभ और पवित्र वस्तुओं के खो जाने के बावजूद SGPC का रवैया ढीला रहा है। गायब हुए हस्तलिखित ग्रंथों और हुक्मनामों को खोजने के लिए अब तक कोई प्राथमिकी (FIR) तक दर्ज नहीं कराई गई है।"
न्यायालय का आदेश
सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, हाईकोर्ट ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सीबीआई, सेना और दोनों सरकारों को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने का आदेश दिया है। यह मामला न केवल कानूनी है, बल्कि करोड़ों सिखों की धार्मिक आस्था और ऐतिहासिक विरासत से भी जुड़ा हुआ है।