जनगणना 2027: डिजिटल अवतार में होगी देश की गणना, आंकड़ों की गोपनीयता पर सरकार का बड़ा आश्वासन

भारत के रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने सोमवार को घोषणा की कि देश की 16वीं जनगणना की प्रक्रिया जल्द ही शुरू होने वाली है। इस बार की जनगणना पूरी तरह डिजिटल होगी, जिसमें आधुनिक तकनीक और गोपनीयता का विशेष ध्यान रखा गया है।

30 Mar 2026  |  203

 

नई दिल्ली। भारत की बहुप्रतीक्षित 'जनगणना 2027' की तैयारियां अब अपने अंतिम चरण में हैं। भारत के रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने सोमवार को घोषणा की कि देश की 16वीं जनगणना की प्रक्रिया जल्द ही शुरू होने वाली है। इस बार की जनगणना पूरी तरह डिजिटल होगी, जिसमें आधुनिक तकनीक और गोपनीयता का विशेष ध्यान रखा गया है।

1 अप्रैल से शुरू होगा पहला चरण

आयुक्त ने जानकारी दी कि जनगणना का फील्ड ऑपरेशन अगले महीने 1 अप्रैल से कुछ राज्यों में शुरू हो जाएगा। यह पूरी प्रक्रिया दो चरणों में संपन्न होगी:

प्रथम चरण (अप्रैल - सितंबर 2026): इसमें 'हाउस लिस्टिंग' (मकानों की सूची) तैयार की जाएगी। इस दौरान लगभग 31 लाख गणनाकार और सुपरवाइजर तैनात किए जाएंगे।

द्वितीय चरण: इस चरण में जनसंख्या की मुख्य गणना होगी, जिसके सवालों की अधिसूचना जल्द जारी की जाएगी।

जाति और धर्म की भी होगी गणना

एक महत्वपूर्ण घोषणा में नारायण ने स्पष्ट किया कि कैबिनेट की मंजूरी के बाद इस बार जाति और धर्म की भी गणना की जाएगी। हालांकि, जाति गणना की कार्यप्रणाली (Methodology) को अभी अंतिम रूप दिया जाना बाकी है।

आंकड़ों की 'लौह सुरक्षा': अदालती कार्यवाही में भी नहीं होगा इस्तेमाल

जनता के मन में आंकड़ों की सुरक्षा को लेकर उठ रहे सवालों पर विराम लगाते हुए जनगणना आयुक्त ने कड़ा आश्वासन दिया:

"जनगणना से जुड़े आंकड़े पूरी तरह गोपनीय रहेंगे। इन्हें न तो किसी के साथ साझा किया जाएगा और न ही इनका उपयोग किसी अदालती कार्यवाही में साक्ष्य के रूप में किया जा सकेगा। जनगणना के दौरान दी गई जानकारी की कोई जांच-पड़ताल नहीं की जाएगी।"

डिजिटल सुविधा और 'सेल्फ-एन्यूमरेशन'

इस बार की जनगणना कई मायनों में आधुनिक होगी:

स्वयं गणना (Self-enumeration): निवासी खुद भी अपनी जानकारी पोर्टल पर दर्ज कर सकेंगे। यह पोर्टल 16 भाषाओं में उपलब्ध होगा।

डिजिटल सत्यापन: खुद से जानकारी भरने वालों को एक 16-अंकों की आईडी मिलेगी, जिसे गणनाकार के आने पर केवल सत्यापित करना होगा।

कोई दस्तावेज नहीं: लोगों को स्पष्ट किया गया है कि गणना के दौरान किसी भी तरह के दस्तावेज या प्रमाण दिखाने की आवश्यकता नहीं होगी।

16 साल बाद हो रही है गणना

उल्लेखनीय है कि देश में हर 10 साल में होने वाली यह प्रक्रिया कोविड-19 महामारी के कारण टल गई थी। पिछली जनगणना 2011 में हुई थी। यह आजादी के बाद की 8वीं और देश की कुल 16वीं जनगणना है। आयुक्त ने नागरिकों से अपील की है कि वे बिना किसी डर के अपनी जानकारी पूरी सच्चाई के साथ साझा करें।

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