याउंडे (कैमरून)। विश्व व्यापार संगठन (WTO) का चार दिवसीय 14वां मंत्रिस्तरीय सम्मेलन (MC14) सोमवार को बिना किसी बड़े समझौते के समाप्त हो गया। इस बैठक का सबसे बड़ा परिणाम यह रहा कि इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसमिशन (डिजिटल डाउनलोड और स्ट्रीमिंग) पर सीमा शुल्क न लगाने की 26 साल पुरानी रोक (Moratorium) आखिरकार समाप्त हो गई है। समय की कमी और सदस्य देशों के बीच गहरे मतभेदों के कारण अब इन विवादित मुद्दों पर चर्चा जिनेवा स्थित मुख्यालय में जारी रहेगी।
क्यों टूटा 26 साल पुराना गतिरोध?
1998 से WTO के सदस्य डिजिटल उत्पादों जैसे फिल्में, संगीत, वीडियो गेम और ई-बुक्स पर सीमा शुल्क (Customs Duty) नहीं लगाने पर सहमत थे।
अमेरिका का रुख: अमेरिका, यूरोपीय संघ और जापान के समर्थन से इस रोक को अगले 5 साल या स्थायी रूप से बढ़ाने पर अड़ा था।
भारत और विकासशील देशों का तर्क: भारत और अन्य विकासशील देशों ने इसका कड़ा विरोध किया। उनका तर्क है कि डिजिटल कंपनियों (जैसे Google और Meta) का मुनाफा तो बढ़ रहा है, लेकिन इस रोक के कारण विकासशील देशों को हर साल लगभग 10 अरब डॉलर के राजस्व का नुकसान हो रहा है। अकेले भारत को सालाना 50 करोड़ डॉलर से अधिक की चपत लग रही है।
TRIPS सुरक्षा कवच भी समाप्त: भारत के लिए बढ़ी चुनौतियां
ई-कॉमर्स पर सहमति न बनने का एक बड़ा असर TRIPS समझौते पर भी पड़ा है। 1995 से लागू 'उल्लंघन न होने' (non-violation) संबंधी शिकायतों के विरुद्ध सुरक्षा कवच अब खत्म हो गया है।
विशेषज्ञों की राय: थिंक टैंक GTRI के अनुसार, इसके बिना अब विकसित देश भारत के पेटेंट कानूनों (जैसे धारा 3d) और अनिवार्य लाइसेंसिंग जैसे प्रावधानों को चुनौती दे सकते हैं, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य और सस्ती दवाओं के लिए महत्वपूर्ण हैं।
WTO सुधारों पर भी नहीं बनी बात
सम्मेलन में संगठन के भीतर सुधारों (WTO Reforms) के मसौदा प्रस्ताव पर भी आम सहमति नहीं बन पाई।
विकसित देश: तेजी से फैसले लेने और कड़े नियमों की मांग कर रहे हैं।
विकासशील देश: अपनी नीतिगत लचीलेपन और आम सहमति वाली व्यवस्था को बचाना चाहते हैं। अंतिम रूपरेखा पर सहमति न बनने के कारण अब 2028 तक के सुधार कार्यक्रमों को वापस जिनेवा भेज दिया गया है।
निष्कर्ष: क्या होगा आगे?
सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे कैमरून के व्यापार मंत्री ल्यूक मैग्लॉयर म्बार्गा अतांगाना ने स्वीकार किया कि समय की कमी और हितों के टकराव के कारण कई मुद्दे लंबित रह गए। इस रोक के समाप्त होने से अब भारत जैसे देशों के पास डिजिटल आयात पर टैरिफ लगाने और अपनी डिजिटल इकोनॉमी को विनियमित करने का अधिकार वापस आ गया है।