रुपए में जोरदार रिकवरी: ऐतिहासिक गिरावट के बाद 128 पैसे सुधरा, RBI के 'मास्टरस्ट्रोक' का दिखा असर

विदेशी मुद्रा बाजार (Forex Market) में पिछले कुछ दिनों से जारी कोहराम के बाद सोमवार को भारतीय रुपए ने शानदार वापसी की है। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 94.85 के ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंचने के बाद, रुपया शुरुआती कारोबार में 128 पैसे की मजबूती के साथ 93.57 के स्तर पर आ गया। रुपए में आई इस अचानक तेजी के पीछे भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा उठाए गए कड़े कदम और बाजार में किए गए हस्तक्षेप को मुख्य वजह माना जा रहा है।

30 Mar 2026  |  54

 

मुंबई। विदेशी मुद्रा बाजार (Forex Market) में पिछले कुछ दिनों से जारी कोहराम के बाद सोमवार को भारतीय रुपए ने शानदार वापसी की है। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 94.85 के ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंचने के बाद, रुपया शुरुआती कारोबार में 128 पैसे की मजबूती के साथ 93.57 के स्तर पर आ गया। रुपए में आई इस अचानक तेजी के पीछे भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा उठाए गए कड़े कदम और बाजार में किए गए हस्तक्षेप को मुख्य वजह माना जा रहा है।

RBI का वो फैसला जिसने बदल दी चाल

रिजर्व बैंक ने करेंसी मार्केट में रुपए की गिरावट को थामने के लिए बैंकों के लिए 'नेट ओपन पोजिशन' (NOP-INR) की सीमा को घटाकर 100 मिलियन डॉलर कर दिया है।

क्या है नियम: 27 मार्च 2026 को जारी सर्कुलर के अनुसार, बैंकों को अपनी ओवरनाइट होल्डिंग सीमा को कम करना होगा।

असर: जिन बैंकों के पास डॉलर की 'लॉन्ग पोजीशन' (खरीद की स्थिति) थी, उन्हें अपनी पोजीशन कम करने के लिए बाजार में डॉलर बेचने पड़े, जिससे रुपए को तत्काल सहारा मिला। बैंकों को इस नियम का पालन 10 अप्रैल तक करना अनिवार्य है।

बाजार के अन्य संकेतकों की स्थिति

रुपए में सुधार के बावजूद वैश्विक परिस्थितियां अब भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई हैं:

इंडिकेटरवर्तमान स्थितिप्रभाव
डॉलर इंडेक्स100.09 (0.06% की मामूली गिरावट)डॉलर अभी भी मजबूत बना हुआ है।
ब्रेंट क्रूड (तेल)$115 प्रति बैरल (2.16% की बढ़त)तेल महंगा होने से डॉलर की मांग बढ़ती है, जो रुपए पर दबाव डालता है।
शेयर बाजार (सेंसेक्स)1,191.24 अंक की गिरावटबाजार में डर का माहौल निवेशकों को बाहर निकाल रहा है।
FII बिकवाली₹4,367.30 करोड़ (शुक्रवार का डेटा)विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं।

क्यों नाजुक बनी हुई है स्थिति?

CR फॉरेक्स एडवाइजर्स के एमडी अमित पबारी के अनुसार, रुपए में आई यह तेजी 'पोजिशन अनवाइंडिंग' (सौदा समेटने) के कारण है, न कि किसी बड़े आर्थिक बुनियादी बदलाव की वजह से।

भू-राजनीतिक तनाव: युद्ध की स्थिति के कारण निवेशक सुरक्षित निवेश (Safe-Haven) के तौर पर डॉलर को चुन रहे हैं, जिससे डॉलर इंडेक्स 100 के ऊपर बना हुआ है।

कच्चे तेल का दबाव: भारत एक बड़ा तेल आयातक देश है। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल सीधे तौर पर व्यापार घाटे को बढ़ाता है और रुपए को कमजोर करता है।

निष्कर्ष: आगे क्या?

जानकारों का मानना है कि आरबीआई के हस्तक्षेप से रुपए को अस्थायी राहत तो मिली है, लेकिन जब तक वैश्विक स्तर पर तनाव कम नहीं होता और कच्चे तेल की कीमतें स्थिर नहीं होतीं, तब तक रुपए पर दबाव बना रहेगा। फिलहाल, 93.50 से 94.20 का दायरा रुपए के लिए काफी महत्वपूर्ण साबित होगा।

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