नई दिल्ली। राज्यसभा सदस्य और बीजेपी ओबीसी मोर्चा के अध्यक्ष डॉ. के. लक्ष्मण ने सोमवार को उच्च सदन में आरक्षण के आधार को लेकर एक विवादित लेकिन बड़ा मुद्दा उठाया। उन्होंने स्पष्ट रूप से मांग की कि मुसलमानों को ओबीसी (OBC) कैटेगरी से बाहर किया जाना चाहिए, क्योंकि उनके अनुसार आरक्षण का आधार धार्मिक नहीं होना चाहिए।
धार्मिक आधार पर आरक्षण का विरोध
डॉ. लक्ष्मण ने तर्क दिया कि ओबीसी सूची में कुछ मुस्लिम समुदायों को शामिल करना संवैधानिक सिद्धांतों के विपरीत है। उन्होंने कहा:
"आरक्षण सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ेपन के आधार पर होना चाहिए, न कि धर्म के आधार पर। धार्मिक आधार पर दिए जाने वाले आरक्षण को समाप्त किया जाना चाहिए।"
बीजेपी नेता के इस बयान पर विपक्षी दलों ने कड़ी आपत्ति जताई और इसे 'विभाजनकारी' बताते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया।
केंद्रीय सूची में 32 नई जातियों को शामिल करने की मांग
धार्मिक आरक्षण के मुद्दे के अलावा, डॉ. लक्ष्मण ने कई राज्यों की पिछड़ी जातियों को केंद्रीय ओबीसी सूची में शामिल करने की वकालत की। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (NCBC) ने पहले ही इसकी सिफारिश कर दी है:
तेलंगाना और आंध्र: उन्होंने विशेष रूप से तेलंगाना की 27 और आंध्र प्रदेश की 5 जातियों को तुरंत केंद्रीय सूची में शामिल करने का आग्रह किया।
अन्य राज्य: उन्होंने राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र के उन ओबीसी समुदायों का मुद्दा भी उठाया जिन्हें राज्य स्तर पर तो मान्यता प्राप्त है, लेकिन वे केंद्रीय लाभों से वंचित हैं।
"सामाजिक न्याय के लिए जरूरी कदम"
डॉ. लक्ष्मण ने सदन में कहा कि इन समुदायों को केंद्रीय सूची में शामिल करने की मांग लंबे समय से लंबित है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि:
राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की सिफारिशों को जल्द लागू किया जाए।
इन जातियों को केंद्रीय स्तर पर मिलने वाले लाभ और अवसर प्रदान किए जाएं ताकि देश में 'सामाजिक न्याय' और 'सशक्तिकरण' सुनिश्चित हो सके।
महत्वपूर्ण पृष्ठभूमि
डॉ. के. लक्ष्मण केवल राज्यसभा सदस्य ही नहीं, बल्कि बीजेपी की केंद्रीय चुनाव समिति (CEC) के सदस्य भी हैं। ऐसे में उनके द्वारा उठाए गए इन मुद्दों को आगामी विधानसभा चुनावों और पार्टी की भावी सामाजिक रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।