पटना। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा सोमवार सुबह बिहार विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा देने के बाद राज्य की राजनीति में बयानबाजी का दौर तेज हो गया है। नेता प्रतिपक्ष और राजद के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने इस कदम को नीतीश कुमार की 'मजबूरी' और भाजपा की 'साजिश' करार देते हुए मुख्यमंत्री पर तंज कसा है।
तेजस्वी का तीखा हमला: "दबाव में लिया गया फैसला"
नीतीश कुमार के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया देते हुए तेजस्वी यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री एक बड़े 'ठग' का शिकार हो गए हैं। उन्होंने मीडिया से बातचीत में निम्नलिखित प्रमुख बातें कहीं:
दबाव की राजनीति: तेजस्वी ने दावा किया कि नीतीश कुमार ने यह इस्तीफा अपनी मर्जी से नहीं, बल्कि भाजपा के भारी दबाव में दिया है।
भविष्यवाणी सच हुई: तेजस्वी ने कहा, "हम शुरू से कह रहे थे कि भाजपा नीतीश जी को मुख्यमंत्री पद पर ज्यादा दिन रहने नहीं देगी। उन्हें सिर्फ 2-3 महीने के लिए कुर्सी पर बिठाया गया था और अब उन्हें हटाया जा रहा है।"
जनता के साथ धोखा: उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने न केवल नीतीश कुमार को, बल्कि बिहार की जनता को भी ठगा है। चुनाव के तुरंत बाद बिजली की दरों में वृद्धि इसका प्रमाण है।
इस्तीफे का तकनीकी कारण और राज्यसभा का सफर
नीतीश कुमार का इस्तीफा एक संवैधानिक प्रक्रिया का हिस्सा भी है:
राज्यसभा के लिए चयन: 16 मार्च को नीतीश कुमार को राज्यसभा के लिए मनोनीत किया गया था। नियमानुसार, संसद के ऊपरी सदन का सदस्य बनने के बाद उन्हें राज्य विधानमंडल के सदन (विधान परिषद) से इस्तीफा देना अनिवार्य था।
मुख्यमंत्री पद की स्थिति: हालांकि उन्होंने परिषद से इस्तीफा दे दिया है, लेकिन वे तब तक बिहार के मुख्यमंत्री बने रहेंगे जब तक कि नए मुख्यमंत्री के नाम पर आधिकारिक मुहर नहीं लग जाती।
मंत्रियों के 'आंसू' पर तेजस्वी का 'ड्रामा' तंज
जब तेजस्वी से पूछा गया कि नीतीश जी के इस्तीफे पर कई मंत्री और विधायक रो रहे हैं, तो उन्होंने इसे "कैमरा देखकर किया गया ड्रामा" बताया। उन्होंने विशेष रूप से मंत्री अशोक चौधरी के संदर्भ में कहा कि लोग आजकल केवल दिखावा कर रहे हैं।
निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री पर रुख
नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार के राजनीतिक भविष्य पर पूछे गए सवाल पर तेजस्वी ने सधा हुआ जवाब दिया:
"मैं व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं करूँगा, लेकिन यदि कोई भी युवा राजनीति में आता है, तो हम उसका स्वागत और समर्थन करते हैं। हालांकि, बिहार के असली मुद्दों पर बात होनी चाहिए, जो फिलहाल नहीं हो रही है।"
निष्कर्ष: बिहार में नए नेतृत्व की आहट?
नीतीश कुमार के दिल्ली (राज्यसभा) जाने के फैसले के बाद अब बिहार की कमान किसके हाथ में होगी, इसे लेकर अटकलें तेज हैं। तेजस्वी यादव के आक्रामक रुख से साफ है कि आने वाले दिनों में बिहार विधानसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव और बढ़ेगा।