लाल सागर में बारूद की गंध: हूती की एंट्री से दुनिया के 3 सबसे बड़े व्यापारिक मार्ग खतरे में; 50% तेल-गैस सप्लाई पर संकट

मध्य-पूर्व (Middle East) में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव अब एक वैश्विक आर्थिक संकट की आहट दे रहा है। ईरान-अमेरिका संघर्ष के बीच हूती विद्रोहियों की सक्रियता ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों पर खतरे के बादल मंडरा दिए हैं। यदि यह संकट गहराता है, तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अर्थव्यवस्था की कमर टूट सकती है।

30 Mar 2026  |  45

 

सना/वॉशिंगटन। यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा इजराइल पर मिसाइलें दागने और युद्ध में सीधे कूदने के ऐलान ने समुद्री व्यापार के 'लाइफलाइन' माने जाने वाले रास्तों को असुरक्षित कर दिया है। वर्तमान में स्थिति यह है कि यदि हूती विद्रोही अपनी धमकियों पर अमल करते हैं, तो दुनिया के तीन प्रमुख जलमार्ग एक साथ बंद हो सकते हैं।

वे 3 रास्ते, जिनसे चलती है दुनिया की अर्थव्यवस्था

जलमार्ग (Route)स्थान और महत्वसंकट का प्रभाव
1. होर्मुज जलडमरूमध्यफारस और ओमान की खाड़ी के बीच।दुनिया की 20% से अधिक तेल-गैस सप्लाई यहीं से होती है। वर्तमान में यह पहले से ही आंशिक रूप से ब्लॉक है।
2. बाब-अल-मंडेबलाल सागर के मुहाने पर (यमन तट के पास)।यहाँ से वैश्विक तेल-गैस का 10% गुजरता है। हूतियों का इस क्षेत्र पर सीधा नियंत्रण है।
3. स्वेज नहरलाल सागर और भूमध्य सागर को जोड़ने वाली 193 KM लंबी नहर।यूरोप और एशिया के बीच व्यापार का मुख्य मार्ग। तेल के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक सामानों की सप्लाई का केंद्र।

हूती विद्रोहियों की ताकत: क्यों डरी हुई है दुनिया?

हूती विद्रोही अब केवल एक स्थानीय गुट नहीं, बल्कि एक आधुनिक 'ड्रोन और मिसाइल' शक्ति बन चुके हैं:

सैन्य क्षमता: उनके पास 3 लाख से अधिक प्रशिक्षित लड़ाके हैं।

मिसाइल भंडार: ईरान के समर्थन से उन्होंने लंबी और कम दूरी की मिसाइलों के साथ-साथ घातक 'हमलावर ड्रोन' का जखीरा तैयार कर लिया है।

इतिहास: 2024-25 में अमेरिका ने इनके खिलाफ एक बड़ा ऑपरेशन चलाया था, लेकिन वह पूरी तरह सफल नहीं हो सका, जिससे हूतियों का मनोबल बढ़ा हुआ है।

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर क्या होगा असर?

अगर ये तीनों रास्ते एक साथ बंद होते हैं, तो इसके परिणाम भयावह हो सकते हैं:

ऊर्जा संकट: दुनिया की 50% तेल और गैस सप्लाई ठप हो जाएगी, जिससे ईंधन की कीमतें आसमान छूने लगेंगी।

महंगाई की मार: स्वेज नहर बंद होने से मालवाहक जहाजों को अफ्रीका का चक्कर लगाकर जाना पड़ेगा, जिससे शिपिंग लागत बढ़ेगी और हर सामान महंगा हो जाएगा।

सप्लाई चेन ब्रेकडाउन: विशेषकर एशिया और यूरोप के बीच होने वाला व्यापार पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो जाएगा।

भारत के लिए चिंता का विषय

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से आयात करता है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें (जो पहले ही $115 के पार हैं) भारतीय मुद्रा और अर्थव्यवस्था पर भारी दबाव डाल रही हैं।

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