चंडीगढ़: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सशस्त्र बलों के कर्मियों के हित में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई सैन्य कर्मी सेवा के दौरान किसी बीमारी के कारण असमर्थ होता है, तो उसकी विकलांगता (Disability) भले ही 20 प्रतिशत से कम आंकी गई हो, उसे न्यूनतम 20 प्रतिशत मानकर 50 प्रतिशत तक 'राउंड ऑफ' करते हुए पेंशन का लाभ दिया जाएगा।
केंद्र सरकार की याचिका खारिज, एएफटी का फैसला बरकरार
जस्टिस हरसिमरन सिंह सेठी और जस्टिस दीपक मंचंदा की खंडपीठ ने केंद्र सरकार द्वारा दायर उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें 'आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल' (AFT) के अप्रैल 2023 के आदेश को चुनौती दी गई थी। ट्रिब्यूनल ने लेफ्टिनेंट कर्नल अमृता को डिसएबिलिटी पेंशन देने का निर्देश दिया था, जिसे केंद्र सरकार ने यह कहते हुए रोकने की कोशिश की थी कि उनकी विकलांगता का स्तर निर्धारित 20% के मानक से कम (15-19%) है।
कोर्ट का तर्क: बीमारी सेवा से जुड़ी, तो पेंशन का हक सुरक्षित
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार के तकनीकी तर्कों को दरकिनार करते हुए कई महत्वपूर्ण टिप्पणियां कीं:
सेवा जनित बीमारी: अदालत ने माना कि अधिकारी 'प्लूरो पल्मोनरी ट्यूबरकुलोसिस' जैसी गंभीर बीमारी से ग्रस्त थीं, जो उनकी सैन्य सेवा के कारण हुई थी। इसी आधार पर उन्हें सेवा से मुक्त किया गया था।
न्यूनतम सीमा का नियम: कोर्ट ने पूर्व के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि यदि किसी सैनिक को शारीरिक अक्षमता के कारण सेवा से बाहर किया जाता है, तो उसकी विकलांगता को स्वतः न्यूनतम 20% माना जाएगा और गणना के लिए इसे 50% तक राउंड ऑफ किया जाएगा।
सैनिकों का मनोबल: पीठ ने जोर देकर कहा कि सशस्त्र बलों के जवानों का मनोबल बनाए रखना राष्ट्र के लिए आवश्यक है। यदि सेवा के दौरान बीमार होने पर उन्हें बिना किसी आर्थिक सुरक्षा या मुआवजे के बाहर कर दिया जाए, तो यह न्याय के मूल सिद्धांतों के विरुद्ध होगा।
"यह निर्विवाद है कि अधिकारी सेवा के दौरान बीमार हुईं। ऐसी स्थिति में केवल प्रतिशत कम होने के तकनीकी आधार पर उन्हें पेंशन के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।" — पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट
क्या है 'राउंड ऑफ' का नियम?
सैन्य नियमों और अदालती व्याख्याओं के अनुसार, यदि किसी सैन्य कर्मी की विकलांगता 20 प्रतिशत से अधिक और 50 प्रतिशत से कम होती है, तो उसे पेंशन लाभ के लिए 50 प्रतिशत मान लिया जाता है। इस फैसले के बाद अब 20 प्रतिशत से कम विकलांगता वाले वे कर्मी भी इस दायरे में आएंगे जिन्हें बीमारी के कारण सेवा छोड़नी पड़ी है।
निष्कर्ष: हाईकोर्ट के इस निर्णय से उन हजारों सैन्य कर्मियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, जो मामूली तकनीकी कारणों से अब तक डिसएबिलिटी पेंशन के लाभ से वंचित थे। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि ट्रिब्यूनल के आदेश में कोई त्रुटि या मनमानी नहीं है, अतः इसे तत्काल लागू किया जाना चाहिए।