RBI का बड़ा फैसला: शेयरों पर लोन की सीमा ₹1 करोड़ तय, IPO और ESOP के लिए भी बदले नियम

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने पूंजी बाजार (Capital Market) में सट्टेबाजी और अत्यधिक जोखिम को नियंत्रित करने के लिए ऋण सीमाओं (Loan Limits) को लेकर नए और कड़े दिशानिर्देश जारी किए हैं। केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया है कि अब पूरे बैंकिंग सिस्टम में किसी भी व्यक्ति को शेयरों और अन्य योग्य प्रतिभूतियों (Securities) के बदले मिलने वाले लोन की अधिकतम सीमा 1 करोड़ रुपये होगी।

31 Mar 2026  |  71

 

मुंबई: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने पूंजी बाजार (Capital Market) में सट्टेबाजी और अत्यधिक जोखिम को नियंत्रित करने के लिए ऋण सीमाओं (Loan Limits) को लेकर नए और कड़े दिशानिर्देश जारी किए हैं। केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया है कि अब पूरे बैंकिंग सिस्टम में किसी भी व्यक्ति को शेयरों और अन्य योग्य प्रतिभूतियों (Securities) के बदले मिलने वाले लोन की अधिकतम सीमा 1 करोड़ रुपये होगी।

IPO और ESOP के लिए ₹25 लाख की सीमा

निवेशकों के लिए आईपीओ (IPO), फॉलो-ऑन ऑफर या ईएसओपी (ESOP) के जरिए शेयर खरीदने के लिए कर्ज लेने के नियमों में भी बदलाव किया गया है:

नई सीमा: प्रति व्यक्ति ऋण की सीमा अब 25 लाख रुपये तय की गई है।

बदलाव: पहले यह सीमा 20 लाख रुपये थी, जिसे अब बढ़ाकर बाजार की जरूरतों के मुताबिक समायोजित किया गया है।

जोखिम कम करने की कवायद

विशेषज्ञों का मानना है कि इन सीमाओं को तय करने के पीछे RBI का मुख्य उद्देश्य बाजार में अचानक आने वाली अस्थिरता से बैंकिंग सिस्टम को बचाना है।

ओवर-लेवरेजिंग पर रोक: अक्सर निवेशक कम समय में मोटा मुनाफा कमाने के लिए अपनी क्षमता से अधिक कर्ज (Over-leveraging) ले लेते हैं। बाजार गिरने की स्थिति में यह बैंकों के लिए 'एनपीए' (NPA) का बड़ा खतरा बन जाता है।

सिस्टम-वाइड कैप: अब एक ही व्यक्ति अलग-अलग बैंकों से मिलकर भी 1 करोड़ रुपये से अधिक का लोन नहीं ले पाएगा, जिससे बैंकों का सामूहिक जोखिम कम होगा।

1 जुलाई तक टली समयसीमा

RBI ने उद्योग जगत और बैंकों की मांग को स्वीकार करते हुए इन नए नियमों को लागू करने की तारीख 1 अप्रैल से बढ़ाकर 1 जुलाई, 2026 कर दी है। तीन महीने की यह अतिरिक्त मोहलत इसलिए दी गई है ताकि वित्तीय संस्थान अपनी प्रणालियों और सॉफ्टवेयर को नए नियमों के अनुरूप अपडेट कर सकें।

अधिग्रहण और विलय (M&A) पर स्पष्टता

कंपनियों के अधिग्रहण और विलय से जुड़े नियमों को भी और अधिक पारदर्शी बनाया गया है:

गारंटी अनिवार्य: यदि कोई बैंक किसी सहायक कंपनी (Subsidiary) या स्पेशल पर्पज व्हीकल (SPV) को किसी दूसरी कंपनी को खरीदने के लिए लोन देता है, तो उसे मुख्य कंपनी (Parent Company) से कॉर्पोरेट गारंटी लेनी होगी।

गैर-वित्तीय कंपनियों पर फोकस: ऐसे लोन अब केवल उन्हीं मामलों में दिए जाएंगे जहाँ किसी 'गैर-वित्तीय कंपनी' पर नियंत्रण हासिल करने का उद्देश्य हो।

"इन बदलावों का मकसद कॉर्पोरेट अधिग्रहण के लिए बैंक फंडिंग को सुव्यवस्थित करना और पूंजी बाजार में संस्थानों को दिए जाने वाले कर्ज पर सख्ती लाना है, ताकि वित्तीय स्थिरता बनी रहे।" — RBI आधिकारिक बयान

निष्कर्ष: RBI के इस कदम से शेयर बाजार में 'रिटेल' और 'हाई नेटवर्थ' (HNI) निवेशकों द्वारा लिए जाने वाले कर्ज पर अंकुश लगेगा, जिससे बाजार में स्वस्थ निवेश की संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा। बैंकों के लिए भी यह एक सुरक्षा कवच की तरह काम करेगा।

अन्य खबरें