पश्चिम एशिया संकट: रत्न एवं आभूषण निर्यातकों को बड़ी राहत, सरकार ने कंप्लायंस के लिए दिया 30 दिन का अतिरिक्त समय

पश्चिम एशिया (वेस्ट एशिया) में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और लॉजिस्टिक्स की चुनौतियों को देखते हुए केंद्र सरकार ने रत्न एवं आभूषण क्षेत्र के लिए राहत का पिटारा खोल दिया है। विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने 'हैंडबुक ऑफ प्रोसीजर' (HBP-2023) के चैप्टर 4 के तहत विशेष प्रावधान लागू करते हुए निर्यात और आयात की समय सीमा को 30 दिन के लिए बढ़ा दिया है।

31 Mar 2026  |  49

 

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया (वेस्ट एशिया) में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और लॉजिस्टिक्स की चुनौतियों को देखते हुए केंद्र सरकार ने रत्न एवं आभूषण क्षेत्र के लिए राहत का पिटारा खोल दिया है। विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने 'हैंडबुक ऑफ प्रोसीजर' (HBP-2023) के चैप्टर 4 के तहत विशेष प्रावधान लागू करते हुए निर्यात और आयात की समय सीमा को 30 दिन के लिए बढ़ा दिया है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस छूट का लाभ उठाने के लिए निर्यातकों को न तो कोई आवेदन करने की आवश्यकता है और न ही कोई अतिरिक्त शुल्क देना होगा।

संकट का सीधा असर: हवाई और समुद्री मार्ग प्रभावित

पिछले महीने अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद पश्चिम एशिया में माल की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है। भारत के कुल रत्न एवं आभूषण निर्यात का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा इसी क्षेत्र में जाता है। चालू वित्त वर्ष (अप्रैल-फरवरी) के दौरान इस क्षेत्र का निर्यात 26.2 अरब डॉलर रहा है। मौजूदा हालातों में हो रही देरी को देखते हुए सरकार ने परिचालन संबंधी कठिनाइयों को दूर करने के लिए यह कदम उठाया है।

किन प्रक्रियाओं में मिली है छूट? (मुख्य बिंदु)

सरकार ने विशिष्ट श्रेणियों के लिए 'एक्सपोर्ट-इंपोर्ट' की अवधि में 30 दिनों का विस्तार किया है:

हीरों का पुन: निर्यात: सर्टिफिकेशन और ग्रेडिंग के लिए आयातित हीरों के पुन: निर्यात की अवधि 90 दिन से बढ़ाकर 120 दिन कर दी गई है।

विदेशी खरीदार की सप्लाई: विदेशी खरीदार से प्राप्त कीमती धातुओं के बदले निर्यात की अवधि भी 90 से 120 दिन कर दी गई है।

प्रदर्शनी और पुनः आयात: विदेशों में प्रदर्शनियों के लिए भेजे गए आभूषणों के पुनः आयात (Re-import) की समय सीमा में भी 30 दिनों का इजाफा किया गया है।

सोने का निर्यात: नामित एजेंसियों से बुक किए गए सोने या लोन बेस पर प्राप्त सोने के बदले आभूषण निर्यात के लिए भी अतिरिक्त समय दिया गया है।

"बिना आवेदन, बिना शुल्क" मिलेगी राहत

DGFT ने स्पष्ट किया है कि यह एकमुश्त राहत (One-time relief) है। निर्यातकों को किसी अलग प्रक्रिया से गुजरने की जरूरत नहीं होगी। सीमा शुल्क (Customs) अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे संबंधित विवरणों के सत्यापन के बाद इन लेन-देन की अनुमति दें।

"यह इस क्षेत्र के लिए एक समयोचित राहत है। पश्चिम एशिया में निर्यात करना वर्तमान में चुनौतीपूर्ण है और इस अतिरिक्त समय से कारोबार की निरंतरता बनी रहेगी और प्रक्रियात्मक दबाव कम होगा।" — कोलिन शाह, पूर्व चेयरमैन, GJEPC

निर्यातकों के लिए क्यों जरूरी है यह समय?

पश्चिम एशिया में तनाव के कारण कार्गो फ्लाइट्स और शिपिंग रूट्स में बदलाव करना पड़ रहा है, जिससे सामान समय पर गंतव्य तक नहीं पहुंच पा रहा है। इस 30 दिन की अतिरिक्त मोहलत से निर्यातकों पर पेनाल्टी का खतरा टल जाएगा और वे मौजूदा वैश्विक हालातों के बीच अपने व्यापारिक समझौतों को आसानी से पूरा कर सकेंगे।

निष्कर्ष: सरकार का यह कदम भारत के रत्न एवं आभूषण उद्योग को वैश्विक अस्थिरता के बीच सुरक्षा कवच प्रदान करने जैसा है। इससे न केवल व्यापार में निश्चितता आएगी, बल्कि निर्यातकों का मनोबल भी बढ़ेगा।

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