नई दिल्ली: केंद्र सरकार डिजिटल इंडिया के दौर में सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर अपनी पकड़ और मजबूत करने जा रही है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने 'आईटी नियम 2021' में संशोधन के लिए एक नया ड्राफ्ट (Second Amendment Rules 2026) तैयार किया है। इस प्रस्ताव का सबसे अहम पहलू यह है कि अब सोशल मीडिया कंपनियों के लिए सरकार द्वारा जारी किसी भी 'एडवाइजरी' या 'निर्देश' को मानना केवल वैकल्पिक नहीं, बल्कि कानूनी रूप से अनिवार्य होगा।
क्या है नया प्रस्ताव? (सब-रूल 4 का प्रावधान)
मंत्रालय द्वारा 30 मार्च 2026 को प्रकाशित इस ड्राफ्ट में रूल 3 के तहत एक नया सब-रूल (4) जोड़ने का प्रस्ताव है। इसके अनुसार:
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और इंटरमीडियरीज को मंत्रालय द्वारा लिखित रूप में जारी किसी भी स्पष्टीकरण, आदेश, मानक प्रक्रिया (SOP), आचार संहिता या दिशा-निर्देश का अक्षरशः पालन करना होगा।
अब तक कई बार कंपनियां सरकारी सलाह को 'सुझाव' मानकर टाल देती थीं, लेकिन नए नियमों के बाद इसे लागू न करना कानून का उल्लंघन माना जाएगा।
'Safe Harbour' सुरक्षा पर लटकी तलवार
प्रस्तावित नियमों का सबसे बड़ा असर सोशल मीडिया कंपनियों को मिलने वाली 'सेफ हार्बर' (Safe Harbour) सुरक्षा पर पड़ सकता है।
अभी क्या है: वर्तमान में कंपनियां यह कहकर बच जाती हैं कि प्लेटफॉर्म पर पोस्ट किया गया कंटेंट यूजर का है और इसके लिए वे जिम्मेदार नहीं हैं।
बदलाव के बाद: यदि कोई प्लेटफॉर्म सरकारी गाइडलाइंस का पालन करने में विफल रहता है, तो उसकी यह सुरक्षा खत्म की जा सकती है। इसका मतलब है कि यूजर द्वारा पोस्ट किए गए गलत कंटेंट के लिए अब प्लेटफॉर्म को भी कानूनी रूप से उत्तरदायी ठहराया जा सकेगा।
फेक न्यूज और डीपफेक के खिलाफ 'ब्रह्मास्त्र'
सरकार का प्राथमिक उद्देश्य इंटरनेट को अधिक सुरक्षित और विश्वसनीय बनाना है। इन संशोधनों के जरिए निम्नलिखित पर लगाम कसी जाएगी:
डीपफेक (Deepfakes): एआई द्वारा निर्मित भ्रामक वीडियो और तस्वीरों पर सख्त नियंत्रण।
फेक न्यूज: गलत सूचनाओं और भ्रामक खबरों के प्रसार को रोकना।
यूजर डेटा: डेटा रखने या हटाने की प्रक्रियाओं को अधिक स्पष्ट और पारदर्शी बनाना।
यूजर्स पर भी होगी कार्रवाई
यह नियम केवल कंपनियों तक सीमित नहीं हैं। यदि कोई यूजर जानबूझकर सोशल मीडिया पर गलत जानकारी या फेक न्यूज फैलाता है, तो नए प्रावधानों के तहत उस यूजर पर भी सीधे कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
"डिजिटल सुरक्षा और जवाबदेही तय करने की दिशा में यह एक निर्णायक कदम है। हम चाहते हैं कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स अपनी जिम्मेदारियों को समझें और सरकारी मानकों का सख्ती से पालन करें।" — मंत्रालय सूत्र
14 अप्रैल तक मांगी गई राय
मंत्रालय ने पारदर्शिता बनाए रखने के लिए इस ड्राफ्ट पर सभी स्टेकहोल्डर्स (कंपनियों, विशेषज्ञों और जनता) से 14 अप्रैल 2026 तक सुझाव और राय मांगी है। इन सुझावों के विश्लेषण के बाद ही नियमों को अंतिम रूप देकर लागू किया जाएगा।
निष्कर्ष: यदि ये प्रस्ताव कानून बनते हैं, तो भारत में डिजिटल कंटेंट और सोशल मीडिया के संचालन का तरीका पूरी तरह बदल जाएगा। यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और ऑनलाइन सुरक्षा के बीच एक नई बहस को भी जन्म दे सकता है, क्योंकि इससे कंटेंट पर सरकारी नियंत्रण पहले से कहीं ज्यादा बढ़ जाएगा।