पटना: बिहार की अर्थव्यवस्था को नई गति देने और ग्रामीण क्षेत्रों में खुशहाली लाने के लिए राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) ने सोमवार को वित्त वर्ष 2026-27 के लिए अपना 'स्टेट फोकस पेपर' जारी कर दिया है। इस रिपोर्ट में राज्य के विभिन्न प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के लिए कुल 2.80 लाख करोड़ रुपये की ऋण क्षमता का अनुमान लगाया गया है। इस रणनीतिक रोडमैप का मुख्य उद्देश्य राज्य से पलायन रोकना और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा करना है।
दिग्गज मंत्रियों की मौजूदगी में हुआ लोकार्पण
पटना में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव, उद्योग मंत्री दिलीप जायसवाल, कृषि मंत्री रामकृपाल यादव और सहकारिता मंत्री प्रमोद चंद्रवंशी ने संयुक्त रूप से इस रिपोर्ट का विमोचन किया।
इस दौरान मंत्रियों ने राज्य के कम कर्ज-जमा अनुपात (CD Ratio) पर गहरी चिंता व्यक्त की। बिहार का सीडी अनुपात वर्तमान में मात्र 57.36% है, जो देश में सबसे कम है। वित्त मंत्री ने बैंकों को कड़ा संदेश देते हुए पूछा कि बिहार की जनता का जमा पैसा उन्हें कर्ज के रूप में क्यों नहीं मिल रहा है? उन्होंने बैंकों को निर्देश दिया कि वे किसानों और छोटे उद्यमियों को कर्ज देने में उदारता बरतें।
कृषि और पशुपालन के लिए 'बजट' की बौछार
नाबार्ड ने कृषि क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने के लिए 1,24,558.45 करोड़ रुपये की ऋण क्षमता का खाका खींचा है:
फसल ऋण: किसानों को समय पर खाद-बीज उपलब्ध कराने के लिए 69,336.19 करोड़ रुपये का प्रावधान।
पशुपालन एवं डेयरी: ग्रामीण आय बढ़ाने के लिए इस क्षेत्र हेतु करीब 18,000 करोड़ रुपये आवंटित।
मछली पालन: नीली क्रांति को बढ़ावा देने के लिए 2,972.89 करोड़ रुपये का लक्ष्य।
MSME: रोजगार सृजन का सबसे बड़ा हथियार
राज्य में छोटे उद्योगों और स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए MSME सेक्टर हेतु 1,24,147.60 करोड़ रुपये की ऋण क्षमता तय की गई है। यह राशि कुटीर उद्योगों और स्थानीय स्तर पर छोटे कारखाने लगाने में मददगार साबित होगी, जिससे युवाओं को रोजगार के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा।
बुनियादी ढांचे और सामाजिक विकास पर जोर
रिपोर्ट में केवल खेती ही नहीं, बल्कि जीवन स्तर सुधारने के लिए भी व्यापक प्रावधान हैं:
शिक्षा एवं आवास: शिक्षा ऋण के लिए 4,586.56 करोड़ और घर बनाने के लिए 11,132.55 करोड़ रुपये।
कोल्ड स्टोरेज व गोदाम: फसल की बर्बादी रोकने के लिए बुनियादी ढांचे हेतु 7,951.16 करोड़ रुपये।
फूड प्रोसेसिंग: कृषि उत्पादों की वैल्यू बढ़ाने वाली यूनिट्स के लिए 6,218.03 करोड़ रुपये।
ऊर्जा और स्वास्थ्य: सौर ऊर्जा के लिए 1,589.25 करोड़ और स्वास्थ्य-सफाई परियोजनाओं के लिए 6,087.53 करोड़ रुपये।
"इस कर्ज योजना का सबसे बड़ा हिस्सा एमएसएमई और कृषि को दिया गया है ताकि छोटे किसान, महिला उद्यमी और ग्रामीण युवा सीधे बैंकिंग सिस्टम से जुड़ सकें और बिहार की आर्थिक प्रगति में भागीदार बनें।" — नाबार्ड रिपोर्ट का सारांश
निष्कर्ष: नाबार्ड का यह 'स्टेट फोकस पेपर' अब बैंकों के लिए जिला स्तर पर कर्ज वितरण का आधार बनेगा। यदि बैंक इन लक्ष्यों को समय पर पूरा करते हैं, तो बिहार के गांवों में न केवल नकदी का प्रवाह बढ़ेगा, बल्कि यह राज्य की जीडीपी में भी एक क्रांतिकारी उछाल ला सकता है।