IMF की बड़ी चेतावनी: अमेरिका-इजराइल-ईरान जंग से वैश्विक अर्थव्यवस्था को खतरा, ₹10,000 के करीब पहुँच सकता है कच्चा तेल

श्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में जारी संघर्ष को एक महीना पूरा होने के साथ ही अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने दुनिया के लिए रेड अलर्ट जारी किया है। IMF के मुख्य अर्थशास्त्रियों, टोबियास एड्रियन और जिहाद अजौर द्वारा जारी विश्लेषण के अनुसार, यह क्षेत्रीय तनाव अब एक वैश्विक आर्थिक संकट का रूप ले रहा है |

31 Mar 2026  |  47

 

वाशिंगटन/नई दिल्ली: पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में जारी संघर्ष को एक महीना पूरा होने के साथ ही अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने दुनिया के लिए रेड अलर्ट जारी किया है। IMF के मुख्य अर्थशास्त्रियों, टोबियास एड्रियन और जिहाद अजौर द्वारा जारी विश्लेषण के अनुसार, यह क्षेत्रीय तनाव अब एक वैश्विक आर्थिक संकट का रूप ले रहा है। रिपोर्ट में आगाह किया गया है कि यदि यह संघर्ष लंबा खिंचता है, तो दुनिया की विकास दर धीमी हो जाएगी और महंगाई का एक नया चक्र शुरू हो सकता है।

होर्मूज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz): सप्लाई चेन की दुखती रग

IMF ने अपनी रिपोर्ट में होर्मूज जलडमरूमध्य को लेकर सबसे ज्यादा चिंता जताई है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए 'लाइफलाइन' माना जाता है:

तेल और गैस की निर्भरता: दुनिया की 25 से 30 प्रतिशत तेल सप्लाई और लगभग 20 प्रतिशत एलएनजी (LNG) इसी रास्ते से होकर गुजरती है।

कीमतों में उछाल: इस रास्ते के बंद होने या बाधित होने की आशंका मात्र से ब्रेंट क्रूड की कीमतें 115 डॉलर प्रति बैरल (लगभग ₹9,600) के पार पहुँच गई हैं।

सप्लाई चेन: ऊर्जा की कीमतों में बढ़ोत्तरी सीधे तौर पर वैश्विक लॉजिस्टिक्स और मैन्युफैक्चरिंग लागत को बढ़ा रही है।

विकासशील और गरीब देशों पर 'दोहरी मार'

IMF का कहना है कि इस संकट की सबसे ज्यादा कीमत एशिया और अफ्रीका के उन गरीब देशों को चुकानी पड़ेगी जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए पूरी तरह आयात पर निर्भर हैं।

सीमित संसाधन: विकसित देशों के पास संकट से लड़ने के लिए फंड है, लेकिन कम आय वाले देशों के पास वित्तीय संसाधनों की कमी है, जिससे वहां ईंधन की किल्लत पैदा हो सकती है।

खाद्य संकट: ईंधन महंगा होने से खेती की लागत बढ़ गई है। साथ ही, खाड़ी देशों से आने वाले उर्वरकों (Fertilizers) की सप्लाई रुकने से भविष्य में फसलों का उत्पादन घटने और 'खाद्य महंगाई' बढ़ने का डर है।

सामाजिक और राजनीतिक अस्थिरता का खतरा

IMF ने एक चौंकाने वाला आंकड़ा पेश किया है कि कम आय वाले देशों में लोग अपनी कमाई का 36 प्रतिशत हिस्सा केवल भोजन पर खर्च करते हैं (विकसित देशों में यह मात्र 9% है)।

चेतावनी: भोजन की कीमतों में थोड़ी सी भी वृद्धि इन देशों में जनता के गुस्से और सामाजिक-राजनीतिक अस्थिरता को जन्म दे सकती है।

वेतन-कीमत चक्र: यदि महंगाई लंबे समय तक बनी रही, तो यह वेतन और कीमतों के बढ़ते चक्र (Wage-Price Spiral) को शुरू कर सकती है, जिसे रोकना किसी भी सेंट्रल बैंक के लिए मुश्किल होगा।

"यह संकट भले ही भौगोलिक रूप से एक क्षेत्र तक सीमित है, लेकिन इसके आर्थिक निशान पूरी दुनिया पर पड़ेंगे। हम स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहे हैं और आने वाले समय में एक विस्तृत आकलन पेश करेंगे।" — IMF आधिकारिक रिपोर्ट

भारत के लिए क्या है संकेत?

भारत अपनी तेल जरूरतों का 80% से अधिक आयात करता है। कच्चे तेल की कीमतों में $115 तक की बढ़त भारत के चालू खाता घाटे (CAD) को बढ़ा सकती है और रुपये पर दबाव और अधिक तेज कर सकती है। जैसा कि हालिया रिपोर्ट्स में देखा गया है, रुपया पहले ही 95 के स्तर के आसपास संघर्ष कर रहा है, ऐसे में ऊर्जा संकट भारत के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है।

निष्कर्ष: IMF का संदेश साफ है—यह युद्ध केवल मिसाइलों और ड्रोन तक सीमित नहीं है, यह वैश्विक रसोई और बाजारों पर भी हमला है। आने वाले कुछ हफ्ते वैश्विक अर्थव्यवस्था की दिशा तय करने में निर्णायक साबित होंगे।

 

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