बेलदा (पश्चिम मेदनीपुर): चुनावी रैली को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आलू किसानों की नाराजगी दूर करने के लिए दो बड़े फैसले लिए हैं। पहला—राज्य के बाहर आलू बेचने पर लगी रोक को हटा लिया गया है, और दूसरा—नुकसान झेल रहे किसानों को फसल बीमा और सरकारी खरीद के जरिए मुआवजा दिया जाएगा।
1. अंतरराज्यीय बिक्री पर 'यू-टर्न'
पिछले साल (2023-24) राज्य सरकार ने स्थानीय कीमतें कम रखने के लिए बिहार, ओडिशा और झारखंड में आलू के निर्यात पर रोक लगा दी थी।
विपक्ष और किसानों का तर्क: इस पाबंदी की वजह से उत्तर प्रदेश के किसानों ने उन बाजारों पर कब्जा कर लिया, जिससे बंगाल के व्यापारियों और कोल्ड स्टोरेज मालिकों को भारी घाटा हुआ।
ताजा फैसला: ममता बनर्जी ने अब साफ कर दिया है कि किसान राज्य के बाहर कहीं भी अपनी उपज बेचने के लिए स्वतंत्र हैं।

2. बंपर पैदावार और कीमतों में गिरावट
इस साल बंगाल में आलू की रिकॉर्ड 130 लाख टन पैदावार हुई है (पिछले साल से 20 लाख टन अधिक)।
कीमतों का संकट: बंपर उत्पादन की वजह से बाजार में आलू की कीमतें गिरकर ₹4 प्रति किलो तक आ गई हैं, जबकि इसकी उत्पादन लागत ही लगभग ₹7.50 प्रति किलो है।
सरकारी हस्तक्षेप: सरकार ने ₹9.50 प्रति किलो की दर से 12 लाख टन आलू खरीदने की प्रतिबद्धता जताई है, हालांकि जमीनी स्तर पर इसकी रफ्तार फिलहाल धीमी है।
3. विशेष कृषि बजट का प्रस्ताव
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए मुख्यमंत्री ने ₹30,000 करोड़ के अलग कृषि बजट का प्रस्ताव रखा है। उन्होंने किसानों को 'अन्नदाता' बताते हुए कहा कि इस विशेष वित्तीय स्वायत्तता से ग्रामीण आजीविका में सुधार होगा।
4. केंद्र सरकार और भाजपा पर तीखा हमला
किसानों के मुद्दों से हटकर ममता बनर्जी ने दिल्ली के "सामंती शासकों" (प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह) पर भी निशाना साधा:
सांप्रदायिक ध्रुवीकरण का आरोप: उन्होंने भाजपा पर सांप्रदायिक आधार पर सत्ता हथियाने का आरोप लगाया और कहा कि असली 'चार्जशीट' तो उनके खिलाफ होनी चाहिए।
दिल्ली पर नजर: उन्होंने दावा किया कि बंगाल जीतने के बाद वे पूरे देश को एकजुट करेंगी और दिल्ली की सत्ता तक पहुंचेंगी।
मतदाताओं से अपील: उन्होंने लोगों से उम्मीदवार की जाति या धर्म भूलकर तृणमूल कांग्रेस को समर्थन देने की अपील की, ताकि बंगाल की संस्कृति और अधिकारों की रक्षा की जा सके।
मुख्य आंकड़े एक नजर में:
| विवरण | आंकड़े / जानकारी |
|---|---|
| अनुमानित उत्पादन | 130 लाख टन (रिकॉर्ड) |
| बाजार मूल्य | ₹4 प्रति किलो |
| उत्पादन लागत | ₹7.50 प्रति किलो |
| प्रस्तावित कृषि बजट | ₹30,000 करोड़ |
| प्रभावित मतदाता | लगभग 40 लाख (15 लाख सीधे किसान) |
निष्कर्ष: आलू किसानों की समस्याओं को सीधे संबोधित करके ममता बनर्जी ने एक बड़े चुनावी खतरे को टालने की कोशिश की है। उत्तर प्रदेश द्वारा बाजार हथियाने और कीमतों के गिरने से उपजा असंतोष तृणमूल कांग्रेस के लिए चुनौती बना हुआ था, जिसे अब 'खुली व्यापार नीति' के जरिए शांत करने का प्रयास किया जा रहा है।