होनहार निकिता की अधूरी सफलता: राजस्थान बोर्ड में हासिल किए 93.88% अंक, पर परिणाम देखने से पहले ही दुनिया को कह दिया अलविदा

राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE) के 12वीं के नतीजों के बीच श्रीगंगानगर जिले से एक अत्यंत भावुक कर देने वाली खबर सामने आई है। जहाँ प्रदेश भर के लाखों छात्र अपनी सफलता का जश्न मना रहे हैं, वहीं एक होनहार छात्रा के घर में उसकी ऐतिहासिक सफलता के बावजूद मातम पसरा हुआ है।

31 Mar 2026  |  63

 

श्रीगंगानगर (रावला): राजस्थान बोर्ड के 12वीं कक्षा के परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद रावला तहसील के एक सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल की छात्रा निकिता का रिजल्ट सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। निकिता ने विपरीत परिस्थितियों के बावजूद 93.88 प्रतिशत अंक हासिल कर अपनी मेधा का परिचय दिया, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।

20 मार्च को हुआ निधन

निकिता लंबे समय से हेपेटाइटिस और डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रही थीं। अपनी बीमारी के बावजूद उन्होंने बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी जारी रखी और परीक्षा दी। दुर्भाग्यवश, परीक्षा परिणाम घोषित होने से ठीक 10 दिन पहले, 20 मार्च 2026 को उनका निधन हो गया। जब बोर्ड ने नतीजे जारी किए, तो उनके नाम के आगे दर्ज शानदार अंकों ने हर किसी की आँखें नम कर दीं।

अभावों में पली-बढ़ी 'बिटिया'

निकिता का परिवार बेहद साधारण और गरीब पृष्ठभूमि से आता है।

माता-पिता: निकिता के माता-पिता दिहाड़ी मजदूरी करके परिवार का पालन-पोषण करते हैं।

संघर्ष: अभावों के बीच निकिता ने न केवल पढ़ाई की, बल्कि सरकारी स्कूल में रहकर जिले की मेरिट सूची के करीब पहुँचने वाली सफलता प्राप्त की। उनके माता-पिता के लिए आज उनकी यह उपलब्धि गर्व से ज्यादा गहरे गम का कारण बन गई है।

राजस्थान बोर्ड 12वीं (RBSE 12th) के मुख्य आंकड़े

इस वर्ष बोर्ड का ओवरऑल रिजल्ट शानदार रहा, जिसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

स्ट्रीमटॉपर का नामअंक (%)
साइंसदीपिका99.8%
आर्ट्सनव्या मीणा और नरपत99.6%
कॉमर्सकंगना कौशल्यानी99.2%
ओवरऑल पास %-97.20%

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शिक्षा मंत्री की प्रतिक्रिया: राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने टॉपर्स से बात कर उन्हें बधाई दी, लेकिन निकिता जैसी होनहार छात्रा का असमय चले जाना पूरे शिक्षा जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है।

निष्कर्ष: निकिता की कहानी हमें यह सिखाती है कि दृढ़ इच्छाशक्ति से बड़ी से बड़ी बाधा को पार किया जा सकता है, लेकिन जीवन की अनिश्चितता के आगे सब बेबस हैं। निकिता आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी यह मार्कशीट उनकी मेहनत और संघर्ष की एक अमर निशानी बनकर रहेगी।

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