वाशिंगटन: मध्य-पूर्व के रणक्षेत्र में जारी भारी तनाव के बीच अमेरिका ने एक ऐसा दावा किया है जिसने वैश्विक राजनीति में खलबली मचा दी है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने घोषणा की है कि ईरान में सत्ता परिवर्तन हो चुका है। पेंटागन में एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान हेगसेथ ने स्पष्ट किया कि ईरान का नया शासन अब "दोराहे" पर खड़ा है—या तो वह बुद्धिमत्ता दिखाते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ समझौता करे, या फिर अमेरिकी सेना के और भी भीषण प्रहारों का सामना करने के लिए तैयार रहे।
मोजतबा खामेनेई के हाथों में कमान?
रक्षा मंत्री हेगसेथ के अनुसार, ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मृत्यु के बाद सत्ता की बागडोर उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को सौंपी गई है। हालांकि, मोजतबा अभी तक सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं, जिससे ईरान की आंतरिक स्थिरता पर सवालिया निशान खड़े हैं। अमेरिका का मानना है कि यह नया नेतृत्व ही अब भविष्य की दिशा तय करेगा, लेकिन फिलहाल स्थिति धुंधली बनी हुई है।
'डायनामिक स्ट्राइक' से ईरान पस्त
जमीनी हकीकत बयां करते हुए हेगसेथ ने बताया कि पिछले 24 घंटों में अमेरिकी वायुसेना ने 200 से अधिक डायनामिक स्ट्राइक (रियल-टाइम हमले) किए हैं। इन हमलों का असर स्पष्ट दिख रहा है:
सैन्य मनोबल में गिरावट: ईरानी सेना के कई कमांड बंकर ध्वस्त हो चुके हैं और सैन्य नेतृत्व भूमिगत होने को मजबूर है।
बुनियादी ढांचा ठप: बिजली, पानी और संचार व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिससे ईरानी खेमे में निराशा और भगदड़ का माहौल है।
हमलों में कमी: अमेरिका के दबाव का असर है कि ईरान की ओर से होने वाले मिसाइल और ड्रोन हमलों में भारी कमी दर्ज की गई है।
"राष्ट्रपति ट्रंप समझौते के लिए द्वार खुले रखे हुए हैं और शर्तें स्पष्ट हैं। लेकिन यदि ईरान ने हठधर्मिता दिखाई, तो हमारी सैन्य कार्रवाई की तीव्रता और बढ़ाई जाएगी। अब विकल्प ईरान के पास कम और हमारे पास ज्यादा हैं।" — पीट हेगसेथ, अमेरिकी रक्षा मंत्री
नाटो के भविष्य पर संकट के बादल
ईरान संकट के बीच हेगसेथ ने नाटो (NATO) को लेकर भी कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने संकेत दिया कि राष्ट्रपति ट्रंप इस सैन्य गठबंधन के भविष्य पर जल्द ही बड़ा फैसला लेंगे।
हेगसेथ ने सहयोगी देशों पर तंज कसते हुए कहा कि संकट की इस घड़ी में कई देशों ने सैन्य सहयोग देने में हिचकिचाहट दिखाई। उन्होंने दो टूक कहा, "अगर जरूरत के समय सहयोगी साथ खड़े नहीं हो सकते, तो ऐसे गठबंधन का कोई अर्थ नहीं रह जाता।" नाटो पर अंतिम निर्णय ईरान अभियान के समापन के बाद लिया जाएगा।
कूटनीति बनाम सैन्य शक्ति
एक तरफ अमेरिका दावा कर रहा है कि वह ईरानी नेताओं के साथ संपर्क में है, वहीं दूसरी तरफ युद्ध के मैदान में कोई ढील नहीं दी जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका 'गाजर और छड़ी' (Carrot and Stick) की नीति अपना रहा है, जहाँ वह बातचीत का विकल्प देते हुए भी सैन्य दबाव को चरम पर बनाए रखना चाहता है।
निष्कर्ष: आने वाले कुछ दिन न केवल ईरान के भविष्य के लिए बल्कि वैश्विक कूटनीति के लिए भी निर्णायक होने वाले हैं। पीट हेगसेथ के शब्दों में, अमेरिकी सैनिक इस मिशन को "आने वाली पीढ़ियों की सुरक्षा" के संकल्प के साथ पूरा करने के लिए मुस्तैद हैं।