मालदा कांड: सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद ममता बनर्जी का बयान, कहा— "प्रशासन मेरे नियंत्रण में नहीं, यह 'सुपर राष्ट्रपति शासन' जैसा"

पश्चिम बंगाल के मालदा में न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाए जाने की घटना ने अब एक बड़े संवैधानिक और राजनीतिक विवाद का रूप ले लिया है। सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी प्रतिक्रिया दी है।

02 Apr 2026  |  31

 

कोलकाता/नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में मतदाता पुनरीक्षण (SIR) के दौरान सात न्यायिक अधिकारियों को घंटों बंधक बनाए रखने की घटना पर मचे बवाल के बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुप्पी तोड़ी है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस मामले में दिखाई गई कड़ाई के बाद मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उन्हें इस गंभीर घटना की प्रारंभिक जानकारी तक नहीं दी गई थी।

"मुझे जानकारी नहीं थी, कौन जिम्मेदार है पता नहीं"

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि राज्य का प्रशासनिक ढांचा इस वक्त उनके सीधे नियंत्रण से बाहर है। उन्होंने कहा:

"मुझे नहीं पता कि इसके लिए कौन जिम्मेदार है... किसी ने मुझे इस बारे में सूचित नहीं किया। वर्तमान में कानून-व्यवस्था की बागडोर मेरे हाथों में नहीं है।"

चुनाव आयोग और केंद्र पर साधा निशाना

ममता बनर्जी ने इस पूरी अव्यवस्था के लिए चुनाव आयोग और केंद्र सरकार को कटघरे में खड़ा किया है। उनके प्रमुख तर्क इस प्रकार हैं:

प्रशासनिक नियंत्रण: मुख्यमंत्री के अनुसार, चुनाव की घोषणा के बाद राज्य की पूरी मशीनरी चुनाव आयोग के निर्देशों पर काम कर रही है, इसलिए किसी भी चूक की जिम्मेदारी आयोग की बनती है।

अधिकारियों की निष्ठा: उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य के अधिकारी अब उनकी बात सुनने के बजाय केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के निर्देशों का पालन कर रहे हैं।

सीमित शक्तियां: ममता बनर्जी ने दावा किया कि राज्य सरकार की निर्णय लेने की क्षमता पूरी तरह प्रभावित हुई है क्योंकि उनकी शक्तियां तकनीकी रूप से स्थानांतरित हो चुकी हैं।

'सुपर राष्ट्रपति शासन' का आरोप

राज्य की मौजूदा स्थिति की तुलना 'सुपर राष्ट्रपति शासन' से करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बंगाल में प्रशासनिक ढांचे को पूरी तरह बदल दिया गया है। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि एक ऐसी व्यवस्था बना दी गई है जहाँ चुनी हुई सरकार मूकदर्शक बनकर रह गई है और फैसले कहीं और से लिए जा रहे हैं।

पृष्ठभूमि: क्यों बढ़ी सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी?

मालदा के मोथाबाड़ी में भीड़ द्वारा तीन महिला न्यायाधीशों सहित सात जजों को लगभग 9 घंटे तक बंधक बनाकर रखने की घटना को न्यायपालिका के सम्मान और सुरक्षा पर सीधा हमला माना जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य प्रशासन से जवाब तलब किया था, जिसके बाद राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है।

संपादकीय टिप्पणी: यह देखना दिलचस्प होगा कि चुनाव आयोग और विपक्षी दल मुख्यमंत्री के इस "लाचारी" वाले बयान पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं, विशेषकर जब राज्य में सुरक्षा और कानून-व्यवस्था एक बड़ा चुनावी मुद्दा बना हुआ है।

अन्य खबरें