दतिया/भोपाल | मध्य प्रदेश की राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर दतिया जिले से आ रही है। बैंक धोखाधड़ी मामले में दोषी करार दिए गए कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की विधानसभा सदस्यता समाप्त कर दी गई है। दिल्ली की विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट द्वारा तीन साल की सजा सुनाए जाने के बाद विधानसभा सचिवालय ने कड़ा रुख अपनाते हुए उनकी सीट को रिक्त घोषित कर दिया है।
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद भूमि विकास बैंक से जुड़ी एक फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में हेरफेर से संबंधित है। आरोप है कि राजेंद्र भारती ने बैंक के अध्यक्ष पद पर रहते हुए अपनी माता, सावित्री श्याम के नाम पर जमा 10.50 लाख रुपये की एफडी की अवधि को नियमों के विरुद्ध 3 वर्ष से बढ़ाकर 15 वर्ष कर दिया था।
बैंक कर्मचारी नरेंद्र सिंह की शिकायत पर हुई जांच में दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ और धोखाधड़ी की पुष्टि हुई। इसके बाद, अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 420 के तहत उन्हें दोषी पाते हुए तीन साल के कारावास की सजा सुनाई।

कानूनी पेंच और सदस्यता का संकट
जनप्रतिनिधित्व कानून के कड़े प्रावधानों के अनुसार, यदि किसी विधायक को दो वर्ष या उससे अधिक की सजा सुनाई जाती है, तो उनकी सदस्यता तत्काल प्रभाव से समाप्त करने का प्रावधान है।
मुख्य कानूनी बिंदु:
अदालत ने अपील दायर करने के लिए 60 दिन का समय अवश्य दिया है, लेकिन सदस्यता बचाने के लिए केवल अपील काफी नहीं है।
सदस्यता बहाल रखने के लिए राजेंद्र भारती को उच्च न्यायालय (High Court) से अपनी दोषसिद्धि (Conviction) पर स्थगन (Stay) प्राप्त करना अनिवार्य होगा।
दिल्ली कोर्ट में हुआ था फैसला
उल्लेखनीय है कि यह मामला पहले ग्वालियर की एमपी-एमएलए कोर्ट में चल रहा था। हालांकि, राजेंद्र भारती की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने मामले की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए इसे दिल्ली की विशेष कोर्ट में स्थानांतरित करने का आदेश दिया था, जहाँ से अब यह अंतिम फैसला आया है।
नरोत्तम मिश्रा को हराकर चर्चा में आए थे भारती
राजेंद्र भारती ने साल 2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के कद्दावर नेता और तत्कालीन गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा को कड़े मुकाबले में हराकर जीत हासिल की थी। इस जीत ने उन्हें प्रदेश की राजनीति के केंद्र में ला दिया था। अब उनकी सदस्यता जाने से दतिया विधानसभा क्षेत्र में एक बार फिर उपचुनाव की आहट सुनाई देने लगी है और क्षेत्रीय राजनीति में सरगर्मी तेज हो गई है।